चांद पर जाने से पहले कौन सा टेस्ट कर रहा है NASA? आर्टेमिस-2 के रॉकेट में भर दिया 2.65 मिलियन लीटर फ्यूल
- Edited by: शिशुपाल कुमार
- Updated Feb 3, 2026, 11:11 AM IST
नासा आर्टेमिस-2 मिशन के लॉन्च से पहले रॉकेट को लेकर एक बड़ा टेस्ट कर रहा है। नासा ने आर्टेमिस-1 मिशन से मिले अनुभवों से इस बार की तैयारियों को और मजबूत बनाया है। बिना चालक के सफल उड़ान भर चुके ओरियन यान ने यह साबित कर दिया था कि वह गहरे अंतरिक्ष की कठोर परिस्थितियों का सामना कर सकता है।
आर्टेमिस-2 रॉकेट में भरा गया ईंधन (फोटो- NASA)
नासा (NASA) ने चांद पर जाने से पहले एक बड़ा टेस्ट शुरू कर दिया है। नासा का आर्टेमिस-2 मिशन फरवरी में लॉन्च होना है। नासा ने अपने इस चंद्र मिशन से पहले एक बड़ा टेस्ट शुरू कर दिया है। इस टेस्ट में नासा ने आर्टेमिस-2 के रॉकेट में लाखों लीटर फ्यूल भर दिया है। इस टेस्टिंग के दौरान रॉकेट में लीकेज का भी पता चला है।
नासा ने आर्टेमिस 2 के टेस्ट पर क्या कहा
नासा ने इसे लेकर लिखा है- "आर्टेमिस II वेट ड्रेस रिहर्सल के हिस्से के तौर पर, NASA की टीमें लॉन्च पैड 39B के अंदर व्हाइट रूम में ओरियन क्रू मॉड्यूल के हैच की आखिरी तैयारी और उसे बंद करने का काम कर रही हैं। यह कदम लॉन्च के दिन की प्रक्रियाओं को सिम्युलेट करता है, जिससे यह पक्का होता है कि स्पेसक्राफ्ट सील है और क्रू लॉन्च के लिए ओरियन में जाने के लिए तैयार है। आर्टेमिस II के एस्ट्रोनॉट इस रिहर्सल में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।
कहां हुआ ये टेस्ट?
फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड 39-बी पर रॉकेट में क्रायोजेनिक तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन भरी गई, जिसकी कुल मात्रा सात लाख गैलन (2.65 मिलियन लीटर) से अधिक रही। यह प्रक्रिया दो दिनों तक चली। 31 जनवरी को शुरू हुए इस परीक्षण में रॉकेट को बिल्कुल उसी तरह तैयार किया गया, जैसे वास्तविक लॉन्च के समय किया जाएगा। फ्यूलिंग टेस्ट अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, क्योंकि इसमें भरे गए ईंधन को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालना भी शामिल है। इसी कारण नासा ने इसे अभी औपचारिक रूप से सफल घोषित नहीं किया है। एजेंसी इस पूरे परीक्षण की समीक्षा के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तृत जानकारी साझा करेगी।
रॉकेट में रिसाव का चला पता
हालांकि, इस दौरान तरल हाइड्रोजन से जुड़े कुछ छोटे रिसाव सामने आए, जिसके चलते ईंधन भरने की प्रक्रिया को बीच में रोकना पड़ा। नासा अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे रिसाव पहले से अनुमानित थे और तकनीकी टीम ने उन्हें मौके पर ही ठीक कर लिया। गौरतलब है कि तरल हाइड्रोजन अत्यंत सूक्ष्म अणुओं वाला होता है, जो बेहद छोटी दरारों से भी बाहर निकल सकता है।
क्या है आर्टेमिस-2 मिशन
आर्टेमिस-2 मिशन नासा के चंद्र कार्यक्रम का अगला बड़ा चरण है, जिसके तहत चार अंतरिक्ष यात्री-रीड विसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैंसेन-करीब दस दिन तक चंद्रमा के चारों ओर यात्रा करेंगे। यह मिशन 1972 के बाद पहली बार इंसानों को चंद्र कक्षा तक ले जाएगा। शुरुआत में इसका प्रक्षेपण 6 फरवरी को प्रस्तावित था, लेकिन खराब मौसम के चलते परीक्षण कार्यक्रम में बदलाव किया गया, जिसके बाद संभावित लॉन्च तारीख 8 फरवरी तय की गई।