दरअसल रॉकेट लॉन्चिंग के समय भारी मात्रा में पानी का प्रयोग होता है, जब रॉकेट का इंजन पावर जेनरेट करने के लिए ईंधन जलाता है और फिर उससे उत्पन्न हुई ऊर्जा का इस्तेमाल कर रॉकेट को ऊपर उठाता है, जब इस प्रक्रिया में काफी मात्रा में उष्मा पैदा होती है, इसी उष्मा से पानी वाष्प बन जाता है।
इसका जवाब हां है, रॉकेट लॉन्चिंग के समय धुआं भी काफी मात्रा में पैदा होता है, रॉकेट जब लॉन्च होता है, तो उसके इंजन में मौजूद ईंधन और ऑक्सीडाइजर बेहद तेजी से जलते हैं। इस दहन प्रक्रिया से अत्यधिक ताप और दबाव बनता है, जिससे गैसें बहुत तेज गति से बाहर निकलती हैं। यही गैसें बाहर आते समय धुएं जैसी दिखाई देती हैं।
दरअसल यह हमेशा धुआं नहीं होता, बल्कि अलग-अलग चीजों का मिश्रण होता है। ठोस ईंधन वाले रॉकेट्स में एल्युमिनियम पाउडर और अन्य रसायन जलते हैं, जिससे घना सफेद धुआं बनता है। वहीं तरल ईंधन वाले रॉकेट्स में तरल ऑक्सीजन और हाइड्रोजन या केरोसीन जलता है, जिससे ज़्यादातर जलवाष्प और गैसें निकलती हैं, जो बादल जैसी दिखती हैं।
लॉन्च पैड पर दिखने वाला ज्यादातर सफेद बादल असल में पानी की भाप होता है। तेज गर्म गैसें जब ठंडी हवा से टकराती हैं, तो भाप संघनित होकर बादल जैसा रूप ले लेती है। इसके अलावा, लॉन्च पैड पर पानी की बौछार भी की जाती है ताकि ताप और ध्वनि को नियंत्रित किया जा सके, जिससे भाप और ज्यादा दिखाई देती है।
रॉकेट लॉन्च के समय पानी का इस्तेमाल कई प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियां करती हैं, खासकर लॉन्च पैड की सुरक्षा, शोर कम करने और संरचना को नुकसान से बचाने के लिए। NASA का केनेडी स्पेस सेंटर दुनिया के सबसे बड़े वाटर डिल्यूज सिस्टम्स में से एक का इस्तेमाल करता है। स्पेस शटल, SLS और पहले Saturn-V लॉन्च के दौरान लाखों लीटर पानी कुछ ही सेकंड में छोड़ा जाता है। ESA के Ariane रॉकेट्स (Ariane-5, Ariane-6) के लॉन्च के समय फ्रेंच गयाना के कौरू स्पेसपोर्ट पर पानी आधारित साउंड सप्रेशन सिस्टम का इस्तेमाल होता है। रूस के बैकोनूर और वोस्तोचनी कॉस्मोड्रोम में Soyuz जैसे रॉकेट्स के लॉन्च के दौरान पानी का उपयोग लॉन्च पैड और फ्लेम ट्रेंच को ठंडा रखने के लिए किया जाता है।
ISRO अपने लॉन्च पैड पर भारी मात्रा में पानी का छिड़काव करता है। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में Gaganyaan, LVM3 और पहले GSLV/PSLV मिशनों के दौरान पानी का प्रयोग ध्वनि तरंगों को कम करने और लॉन्च पैड को अत्यधिक गर्मी से बचाने के लिए किया जाता है।
चीन की अंतरिक्ष एजेंसी अपने जिउक्वान, वेनचांग और ताइयुआन लॉन्च सेंटरों पर Long March रॉकेट्स के लिए पानी आधारित कूलिंग और साउंड डैम्पिंग सिस्टम का उपयोग करती है। जापान की JAXA, तनगाशिमा स्पेस सेंटर से H-IIA और H-IIB रॉकेट्स के लॉन्च के दौरान वाटर डिल्यूज सिस्टम का इस्तेमाल करती है।