नई दिल्ली: WMO ने चेतावनी दी है कि 3.6 अरब लोग हर साल कम से कम एक महीने पानी की कमी से जूझते हैं, और 2050 तक यह संख्या बढ़कर 5 अरब हो सकती है विश्व मौसम संगठन (WMO) की ताज़ा रिपोर्ट ने दुनिया को एक बार फिर चेतावनी दी है कि अब जलवायु परिवर्तन का असर साफ दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में दुनिया भर में पानी का चक्र बेहद अस्थिर रहा कहीं भारी बारिश और बाढ़, तो कहीं भीषण सूखा।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के केवल एक-तिहाई नदी क्षेत्रों में ही पानी की स्थिति सामान्य रही, जबकि बाकी क्षेत्रों में पानी या तो बहुत ज्यादा था या बेहद कम। यह लगातार छठा साल है, जब यह असंतुलन देखा गया है।
2024 रहा अब तक का सबसे गर्म साल
इस साल की शुरुआत एल-नीनो (El Niño) जैसी मौसमीय घटना से हुई, जिससे तापमान काफी बढ़ा। इसके चलते दक्षिण अमेरिका, खासकर अमेज़न, और दक्षिण अफ्रीका में भयंकर सूखा पड़ा, जबकि भारत, पाकिस्तान, मध्य एशिया और यूरोप के कई हिस्सों में सामान्य से कहीं अधिक बारिश दर्ज की गई।
ग्लेशियरों का लगातार पिघलना जारी
WMO की रिपोर्ट बताती है कि साल 2024 में लगातार तीसरे साल दुनिया के सभी ग्लेशियरों ने बर्फ खोई है। इस साल लगभग 450 गीगाटन बर्फ पिघली, जो इतना पानी है कि 1.2 मिमी समुद्र का जलस्तर बढ़ गया। इससे समुद्र किनारे बसे करोड़ों लोगों के लिए खतरा और बढ़ गया है।
जल संकट की ओर बढ़ती दुनिया
WMO ने चेतावनी दी है कि 3.6 अरब लोग हर साल कम से कम एक महीने पानी की कमी से जूझते हैं, और 2050 तक यह संख्या बढ़कर 5 अरब हो सकती है। रिपोर्ट कहती है कि अगर हम पानी की स्थिति को समय रहते नहीं समझे और संभाला नहीं, तो पूरी दुनिया गंभीर जल संकट की ओर बढ़ सकती है। WMO की महासचिव सेलेस्टे साओलो ने कहा, “हम उस चीज़ को नहीं सुधार सकते जिसे हम माप नहीं सकते।” उन्होंने कहा कि जलवायु से जुड़ी घटनाओं की निगरानी, और डेटा शेयरिंग को बढ़ावा देना बेहद ज़रूरी है ताकि सरकारें और संस्थाएं समय पर निर्णय ले सकें।
पानी की मात्रा और गुणवत्ता दोनों बिगड़ रही हैं
WMO की रिपोर्ट दुनिया को सचेत कर रही है, पानी की मात्रा और गुणवत्ता दोनों बिगड़ रही हैं। अगर हम अब भी नहीं चेते, तो आने वाले वर्षों में सूखा, बाढ़, ग्लेशियर पिघलना और पानी की कमी जैसी समस्याएं और भी विकराल रूप ले सकती हैं
कहीं बहुत बारिश, कहीं बिलकुल सूखा
कहीं बहुत बारिश, कहीं बिलकुल सूखा , दुनिया की 70% से ज़्यादा नदियों में या तो बहुत कम पानी था या बहुत ज़्यादा। ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं सिर्फ 2024 में ही बर्फ के पहाड़ों से 450 अरब टन बर्फ पिघल गई। समुद्र का पानी बढ़ रहा है ये पिघली बर्फ समुद्र का स्तर बढ़ा रही है, जिससे तटीय इलाकों को खतरा है। तापमान भी बढ़ा है El Niño जैसे मौसम के कारण गर्मी और सूखा दोनों बढ़े हैं।
भारत की स्थिति
जो ग्लेशियर अभी पानी दे रहे हैं, वो जल्द ही पूरी तरह पिघल जाएंगे। फिर वहां से कोई पानी नहीं मिलेगा।जब बारिश होती है, तो बहुत तेज़ होती है, जिससे फसलें बर्बाद हो जाती हैं और सड़कों‑घरों में पानी भर जाता है। बहुत से इलाकों में लंबे समय तक सूखा पड़ रहा है, जिससे खेती और जीवन मुश्किल हो रहा है।
अब क्या करना चाहिए?
- पानी बचाने की आदत डालनी होगी।
- वृक्षारोपण, वर्षा जल संचयन और पर्यावरण की रक्षा जरूरी है।
- सरकारों को चाहिए कि वो पानी की बेहतर योजना बनाए और ग्लेशियरों की रक्षा के लिए कदम उठाए।
- यह रिपोर्ट एक चेतावनी की घंटी है। अगर अब भी हम नहीं चेते, तो आने वाले सालों में पानी की भारी कमी, अकाल, और भयंकर बाढ़ जैसी घटनाएं आम हो जाएंगी।
