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अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने शुभांशु शुक्ला, इन भारतीय व्यंजनों का ले रहे हैं लुत्फ

शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए।

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सबसे लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने वाले भारतीय बने शुभांशु शुक्ला

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

नयी दिल्ली: अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर मौजूद साथी अंतरिक्ष यात्रियों ने आम रस, गाजर का हलवा, मूंग दाल का हलवा और अन्य देशों के व्यंजनों का लुत्फ उठाया।शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन के तहत 26 जून को आईएसएस पर पहुंचे थे। उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन पर एक सप्ताह पूरा कर लिया और एक दिन का अवकाश लिया, जिसे उन्होंने धरती पर अपने परिवार और दोस्तों के साथ बातचीत कर बिताया।

एक्सिओम-4 (एक्स-4) चालक दल में शुक्ला और तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। उन्होंने 3 जुलाई तक पृथ्वी की 113 परिक्रमाएं कीं, जिसके तहत 40.66 लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की गई। यह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी का लगभग 12 गुना है।शुक्ला ने ‘एचएएम’ रेडियो कनेक्शन पर बेंगलुरु स्थित यूआरएससी (यू आर राव उपग्रह केंद्र) के वैज्ञानिकों के साथ संक्षिप्त बातचीत में कहा कि यह एक अच्छा क्षण था। हमें विभिन्न देशों से भोजन मिला और हमने इसे सभी सदस्यों के साथ साझा किया।

शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए

बृहस्पतिवार को शुक्ला अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए। उन्होंने राकेश शर्मा का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 1984 में सोवियत इंटरकॉस्मोस कार्यक्रम के तहत अंतरिक्ष में सात दिन, 21 घंटे और 40 मिनट बिताए थे। बृहस्पतिवार तक शुक्ला ने अंतरिक्ष में नौ दिन बिताए हैं।उन्होंने कहा कि मिशन का सबसे रोमांचक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से पृथ्वी को देखना था।

अंतरिक्ष में काम करना रोमांचक अनुभव- शुक्ला

शुक्ला ने कहा कि विभिन्न देशों के लोगों के साथ काम करना भी एक रोमांचक अनुभव रहा। फ्लोरिडा के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण के अपने अनुभव को साझा करते हुए, शुक्ला ने कहा कि रॉकेट लॉन्च बहुत गतिशील था, यह बहुत तेज था। जैसे-जैसे आप ऊपर की ओर जाते हैं, आप तेजी से आगे बढ़ते हैं और त्वरण (वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर) काफी अधिक थी।

एक्सिओम-4 मिशन में अनुभवी अंतरिक्ष यात्री पेग्गी व्हिटसन कमांडर हैं, शुक्ला पायलट हैं तथा पोलैंड के अंतरिक्ष यात्री स्लावोज़ ज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के अंतरिक्ष यात्री टिबोर कापू मिशन विशेषज्ञ हैं।‘एक्सिओम स्पेस’ के एक बयान में कहा गया है कि केवल सात दिनों में, एक्सिओम-4 अंतरिक्ष यात्रियों ने वैज्ञानिक अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

कई प्रयोग कर रहे हैं शुभांशु शुक्ला

बयान में कहा गया है कि शुक्ला ऐसे प्रयोग कर रहे हैं जिनसे यह पता चलेगा कि माइक्रोग्रैविटी शैवाल के विकास और आनुवंशिक व्यवहार को कैसे प्रभावित करती है तथा टार्डिग्रेड्स, कठोर सूक्ष्म जीव, अंतरिक्ष में कैसे जीवित रहते हैं और प्रजनन करते हैं।शुक्ला द्वारा किए गए प्रयोगों के निष्कर्षों से कोशिकीय आणविक तंत्र के बारे में नयी जानकारी मिल सकती है, जो पृथ्वी पर चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक ज्ञान में तब्दील हो सकती है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेन्द्र सिंह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि यह भारत के लिए गौरव का क्षण है, क्योंकि हमारे भारतीय वायुसेना अधिकारी एक्सिओम मिशन 4 के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने वाले पहले भारतीय सैन्य अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं। 40 वर्षों के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले वह पहले भारतीय हैं...।

शुक्ला ने कहा कि नासा, इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन), स्पेसएक्स, एक्सिओम, ईएसए (यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी), जेएक्सए (जापानी वांतरिक्ष अन्वेषण अभिकरण) जैसी एजेंसियां, सभी इस मिशन को सफल बनाने के लिए एक साथ आई हैं। शुक्ला इसरो-नासा की संयुक्त परियोजना के तहत आईएसएस पर 14 दिवसीय मिशन पर हैं। (भाषा)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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