421 KM की ऊंचाई से सहारा रेगिस्तान में दिखा 'अंगूठी' जैसा पहाड़; वैज्ञानिक भी हैं दंग! आखिर क्या है ये बला?
Rings of Rock: धरती से 421 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) से सहारा रेगिस्तान के सबसे शुष्क इलाके की एक ऐसी तस्वीर कैप्चर की गई है जिसकी चर्चा चौतरफा हो रही है। इस तस्वीर में एक अंगूठी जैसी आकृत्ति वाला पहाड़ दिखाई दे रहा है, जिसे जबल अर्कानू के नाम से जाना जाता है। इसकी गोलाकार आकृत्तियां ही सुर्खियों में छाई रहती हैं तो चलिए समझते हैं कि आईएसएस पर मौजूद अंतरिक्ष यात्री द्वारा कैप्चर की गई तस्वीर की क्या खासियत है।
ISS से कैप्चर हुआ अद्भुत नजारा
आईएसएस पर सवार एक अंतरिक्ष यात्री ने लीबिया के जबल अर्कानू में खूबसूरत गोलाकार आकृत्तियों वाली पहाड़ी को कैप्चर किया, जो अंतरिक्ष से 'अंगूठी' जैसी प्रतीत होती है। (फोटो साभार: NASA)
कब कैप्चर हुआ खूबसूरत नजारा
नासा की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरिक्ष यात्री ने 13 सितंबर, 2025 को जबल अर्कानू की शानदार तस्वीर कैप्चर की जिसकी चौतरफा चर्चा हो रही है। (फोटो साभार: NASA)
कहां है जबल अर्कानू
जबल अर्कानू, जिसे जबल अरकनू भी कहा जाता है, लीबिया के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में मिस्र की सीमा के पास मौजूद है। इसके आसपास कई पर्वत श्रृंखलाएं हैं। (फोटो साभार: NASA)
क्या उल्कापिंड के टकराव से बनी पहाड़ियां
शुरूआती दौर में ऐसा माना जाता रहा कि अंगूठी जैसे पहाड़ अंतरिक्ष से गिरे उल्कापिंडों के टकराव की वजह से बने हैं, लेकिन बाद में जब गहन जांच और विश्लेषण के आधार पर इन कल्पनाओं को खारिज कर दिया है। (फोटो साभार: NASA)
कैसे बना ऐसा खूबसूरत पहाड़
वैज्ञानिकों के मुताबिक, अंगूठी जैसी गोल आकृत्तियों वाली संरचनाएं तब बनीं जब धरती के भीतर से बार-बार गर्म पिघला हुआ मैग्मा ऊपर आया और आसपास की चट्टानों में घुस गया। (फोटो साभार: NASA)
किस तरह की हैं चट्टानें
जबल अर्कानू की आग्नेय चट्टानें मुख्यत: बेसाल्ट और ग्रेनाइट से बनी हुई हैं। इसके उत्तर में बलुआ पत्थर, चूना पत्थर और क्वार्ट्ज से बनी 'टोपी जैसी' संरचना भी मौजूद हैं। (फोटो साभार: NASA)
कम बारिश वाला इलाका
नासा और JAXA के मुताबिक, दक्षिण-पूर्वी लीबिया, मिस्र और उत्तरी सूडान के आसपास के इलाकों में सालभर में 1-5 मिलीमीटर तक ही बारिश होती है। हालांकि, जबल अर्कानू जैसे आसपास के पर्वतीय इलाकों में थोड़ी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है जो लगभग 5-10 मिलीमीटर तक है। (फोटो साभार: NASA)
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