मशहूर गायक जुबीन गर्ग की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के आयोजक और आरोपी श्यामकानु महंता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। महंता ने असम पुलिस की एसआईटी जांच पर सवाल उठाते हुए इसे केंद्रीय एजेंसी जैसे सीबीआई या एनआईए को सौंपने की मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि स्थानीय माहौल और मीडिया ट्रायल के चलते निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे मामले की निगरानी एक सेवानिवृत्त जज से कराने की मांग की गई है।
एसआईटी से जांच ट्रांसफर की मांग
महंता की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि असम पुलिस की एसआईटी पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उनका आरोप है कि राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारी सोशल मीडिया पर टिप्पणी कर चुके हैं, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए, मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट इस जांच की निगरानी करे और एक रिटायर्ड जज को इसकी देखरेख सौंपी जाए। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और लोगों का भरोसा भी कायम होगा।
असम से बाहर FIR ट्रांसफर की भी मांग
महंता ने यह भी मांग की है कि जुबीन गर्ग की मौत से जुड़ी एफआईआर असम से बाहर किसी अन्य राज्य में ट्रांसफर की जाए। उनका कहना है कि असम में उनके खिलाफ माहौल बेहद पक्षपाती है। यहां तक कि ऑल असम लॉयर्स एसोसिएशन ने भी अपने सदस्यों से कहा है कि वे इस मामले में आरोपियों की पैरवी न करें।
गिरफ्तारी से पहले मांगा था संरक्षण
30 सितंबर को दाखिल की गई याचिका में महंता ने गिरफ्तारी से प्रोटेक्शन भी मांगा था। लेकिन इसके कुछ ही समय बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अब उनके वकीलों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए याचिका में संशोधन किया जाएगा।
मीडिया ट्रायल और जनदबाव का आरोप
महंता ने अपनी अर्जी में दावा किया है कि वे जुबीन गर्ग के बेहद करीबी थे और घटना के दिन सिंगापुर में कार्यक्रम की तैयारियों में व्यस्त थे। उन्होंने कहा कि उन पर मीडिया ट्रायल के जरिए झूठा दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है। याचिका में कहा गया है कि यह मामला केवल जांच एजेंसी ही नहीं बल्कि जनदबाव और राजनीति से भी प्रभावित है।
