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जगन मोहन रेड्डी को सपोर्ट करने पहुंचे अखिलेश और संजय राउत, क्या INDIA गठबंधन का हिस्सा बनेगी YSRCP?

Jagan Mohan Reddy: इंडिया गठबंधन के कई नेता जगन मोहन रेड्डी के विरोध प्रदर्शन में दिखाई दिए। इसमें अखिलेश यादव और संजय राउत जैसे नाम शामिल हैं। सके बाद से यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि क्या वाईएसआरसीपी भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनने जा रही है।

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जगन मोहन रेड्डी-अखिलेश यादव।

Photo : ANI

Jagan Mohan Reddy: आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने बुधवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। उन्होंने राज्य की नवनिर्वाचित टीडीपी सरकार के खिलाफ राज्य में हिंसा फैलाने और YSRCP के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया। जगन रेड्डी ने कहा, राज्य में आज वे सत्ता में हैं। कल हम सत्ता में थे। कल फिर हम सत्ता में आ सकते हैं, लेकिन हमने कभी भी इस तरह के व्यवहार का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा, आंध्र प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद कानून व्यवस्था बिगड़ती जा रही है और 45 दिन के अंदर 30 से ज्यादा लोगों की हत्या कर दी गई।

जगन मोहन रेड्डी के इस धरना प्रदर्शन को विपक्षी इंडिया गठबंधन का भी फुल सपोर्ट मिला। कई विपक्षी नेता जगन रेड्डी के साथ इस धरना प्रदर्शन में दिखाई दिए और केंद्र सरकार पर हमला बोला। इसके बाद से यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि क्या वाईएसआरसीपी भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनने जा रही है। बता दें, वाईएसआरसीपी के लोकसभा में 4 और राज्यसभा में 11 सांसद हैं।

इंडिया गठबंधन के ये नेता रहे मौजूद

एनडीए गठबंधन में शामिल आंध्र प्रदेश की टीडीपी सरकार के खिलाफ इस धरना प्रदर्शन में इंडिया गठबंधन के कई नेता पहुंचे। इनमें सबसे बड़ा नाम समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का है, जो जगन रेड्डी के साथ बैठे दिखाई दिए। इसके अलावा शिवसेना नेता संजय राउत, सपा सांसद राम गोपाल यादव, शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी, अरविंद सावंत भी जगन मोहन रेड्डी के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे।

विधानसभा चुनाव हारने के बाद पहली दिल्ली यात्रा

आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में हार के बाद वाईएसआरसीपी चीफ जगन मोहन रेड्डी की यह पहली दिल्ली यात्रा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान जगन रेड्डी ने कहा, कल हम सत्ता में थे, लेकिन हमने कभी इस तरह के व्यवहार का प्रचार नहीं किया। हमने कभी भी हमलों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने को बढ़ावा नहीं दिया। आज, आंध्र प्रदेश में स्थिति अलग है। उन्होंने कहा, हम दिल्ली में इस देश के सामने खड़े हैं और हम सवाल करते हैं कि आंध्र प्रदेश में लोकतंत्र प्रचलित है या नहीं। टीडीपी सरकार के सत्ता में आने के 45 दिनों के भीतर, 30 से अधिक लोगों की हत्या कर दी गई है और हमले हो रहे हैं। कई संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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