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दवा का पूरा पत्ता खरीदने को दबाव नहीं बना सकेंगे दुकानदार, मोदी सरकार का मंत्रालय कर रहा इस प्लान पर काम

  • Produced by: अभिषेक गुप्ता
  • Updated May 25, 2023, 07:19 PM IST

Medicine Strips Latest Update: अधिकारियों ने कहा कि जब लोगों को पूरा पत्ता खरीदने के लिए कहा जाता है या उन पर इसके लिए दबाव बनाया जाता है, तब न सिर्फ दवा बर्बाद होती हैं, बल्कि उन पर फिजूल में आर्थिक दबाव भी पड़ता है।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)

Photo : iStock

Medicine Strips Latest Update: आने वाले समय में आपको दवा का पूरा पत्ता (Medicine Strip) नहीं खरीदना पड़ेगा। आप चंद टैबलेट्स या फिर कैप्सूल्स लेकर भी अपना काम चला सकेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि उपभोक्ता मामलों से जुड़ा मंत्रालय (Consumer Affairs Ministry) फिलहाल फार्मा जगत के साथ मिलकर एक योजना पर काम कर रहा है, जिसके तहत परफोरेटेड मेडिसिन स्ट्रिप्स (Perforated Medicine Strips) रहेंगी, जिन पर हर सेग्मेंट पर मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट का जिक्र मिलेगा। ऐसे में जब आप कुछ टैबलेट्स खरीदें तब भी आपको कटी या अधूरी स्ट्रिप पर भी सभी जरूरी जानकारी मिल जाए। यही नहीं, दूसरे उस विकल्प पर भी संभवनाएं तलाशी जा रही हैं, जिसमें मेडिसिन स्ट्रिप्स पर क्यू-आर कोड होगा।

सूत्रों ने हमारे सहयोगी अंग्रेजी अखबार दि टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई) को इस बारे में बताया, फार्मा इंडस्ट्री के साथ सलाह-मशविरे के साथ इन विकल्पों को देखा-समझा जा रहा है। दरअसल, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की ओर से संचालन नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (एनसीएच) को केमिस्टों की कई शिकायतें मिली थीं, जिनमें कहा गया था कि कस्टमर्स से वे (केमिस्ट या दवा दुकानदार) दवा का समूचा पत्ता खरीदने के लिए कहते हैं।

हाल ही में मंत्रालय ने इस बारे में फार्मा और मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ परामर्श किया था, जिसमें ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) के टॉप अफसर भी मौजूद थे। अधिकारियों की ओर से बताया गया था कि इस मसले पर चर्चा की गई है और मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि दवाओं की पैकिंग को लेकर नई तकनीक पर संभावनाएं तलाशी जानी चाहिए।

अधिकारियों ने कहा कि जब लोगों को पूरा पत्ता खरीदने के लिए कहा जाता है या उन पर इसके लिए दबाव बनाया जाता है, तब न सिर्फ दवा बर्बाद होती हैं, बल्कि उन पर फिजूल में आर्थिक दबाव भी पड़ता है। टीओआई को जितनी जानकारी है, उस हिसाब से इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने हर टैबलेट के पैक पर क्यूआर कोड प्रिंट करने की बात पर जोर दिया, जिस पर 10 पैसे से कम का खर्च आएगा।

अभिषेक गुप्ता
अभिषेक गुप्ता author

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