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world sleep day: बेंगलुरू की यह फर्म सोने के लिए दे रही छुट्टी, क्या आपकी कंपनी भी देती है ऐसा सरप्राइज?

  • Written by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 17, 2023, 06:42 PM IST

आज अंतरराष्ट्रीय नींद दिवस है। दुनिया में हर साल यह दिन मनाया जाता है। बेंगलुरू की एक कंपनी ने इस दिन को सेलिब्रेट करने के लिए अपने कर्मचारियों को नींद का तोहफा दिया है।

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बेंगलुरू की कंपनी ने वर्ल्ड स्लीप डे पर कर्मचारियों को नींद पूरी करने के लिए छुट्टी दी है।

Photo : iStock

Sleep day 2023: दुनिया के कई देश ऐसे हैं, जहां, कर्मचारियों पर काम का दबाव बहुत ज्यादा है। भारत भी इन देशों में से एक हैं, जहां की रिपोर्ट बहुत ही खराब है। स्थिति यह है कि काम का असर कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर पड़ने लगा है। ऐसे में बेंगलुरू की एक कंपनी ऐसी है, जो अपने कर्मचारियों को सोने के लिए छुट्टी दे रही है।

कंपनी ने यह फैसला वर्ल्ड स्लीप डे ( World Sleep Day 2023) पर किया है। कंपनी का कहना है कि उसे यह घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि World Sleep Day यानी 17 मार्च 2023 को कर्मचारियों को सोने के लिए वैकल्पिक छुट्टी दी गई है। वेकफिट सॉल्यूशन नाम की कंपनी ने कर्मचारियों को छुट्टी ने इस घोषण को लिंकडिन पर साझा भी किया है।

कंपनी ने कर्मचारियों को भेजा मेल

कंपनी की ओर से अपने कर्मचारियों को छुट्टी का मेल भेजा गया है। इसमें कंपनी ने लिखा है, लंबे वीकेंड के बाद आराम करने के लिए यह दिन बिल्कुल परफेक्ट है। कंपनी ने इसे सरप्राइज हॉलिडे नाम दिया है। शुक्रवार को मिली इस छुट्टी के बाद कंपनी के कर्मचारियों को आराम करने का भरपूर मौका मिल गया है। दरअसल, उन्हें शनिवार और रविवार की छुट्टी भी मिल गई है। इससे पहले बीते साल कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए राइट टू नैप पॉलिसी की भी घोषणा की थी, इसके तहत काम के घंटों के दौरान कर्मचारियों को 30 मिनट की झपकी लेने की अनुमति दी गई थी।

काम के दौरान नींद महसूस करने वाले कर्मचारियों की बढ़ी संख्या

कंपनी ने बताया है कि ग्रेट इंडियन स्पील स्कोर के अनुसार, 2022 में ऑफिस में काम के घंटों के दौरान नींद महसूस करने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 21 प्रतिशत तक पहुंच गई है। नींद में कमी के दौरान स्लीप डे पर नींद से अच्छा तोहफा कर्मचारियों के लिए और कोई नहीं हो सकता है।

अच्छी सेहत के लिए बेहतर नींद है जरूरी

अगर आप पूरी नींद नहीं लेते हैं, तो इसका असर आपके स्वास्थ्य पर पड़ता है। नींद न लेने से आपका शरीर बीमारियों का घर बन जाता है, इसके साथ ही साथ आपके स्वभाव में भी परिवर्तन आने लगता है। इसीलिए डॉक्टर्स से लेकर विशेषज्ञ भी भरपूर नींद लेने की सलाह देते हैं। दुनिया में वर्ल्ड स्लीप डे भी इसी तर्ज पर मनाया जाता है। इस बार इस विशेष दिन को स्लीप इज इसेंशियन फॉर हेल्थ की थीम पर मनाया जा रहा है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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