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Justice Varma Cash Case: जस्टिस वर्मा कैश कांड में FIR दर्ज क्यों नहीं हुई- संसदीय समिति की बैठक में सांसदों का सवाल

Justice Varma Cash Case: सांसदों ने सवाल किया कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास से बेहिसाब नकदी की बरामदगी के मामले पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई और उन्होंने आचार संहिता लागू करने की मांग की। कुछ सांसदों ने यह भी पूछा कि न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने का कोई प्रस्ताव अब तक क्यों नहीं लाया गया है।

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जस्टिस यशवंत वर्मा (फाइल फोटो)

Photo : PTI

Justice Varma Cash Case: संसद की एक स्थायी समिति की बैठक में मंगलवार को कई सांसदों ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहते न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास से जले हुए नोट मिलने के मामले में कोई प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की गई है और न्याय विभाग को इस प्रकरण को लेकर विस्तृत नोट तैयार करना चाहिए। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

न्यायाधीशों के लिए एक आचार संहिता की मांग

सांसदों ने न्यायाधीशों के लिए एक आचार संहिता तय करने की भी मांग की और इस बात पर जोर दिया कि उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद कम से कम पांच साल की अवधि तक कोई सरकारी उत्तरदायित्व नहीं मिलना चाहिए। कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय संबंधी संसदीय समिति की बैठक के दौरान विभिन्न दलों के सांसदों ने इस मुद्दे को उठाया और विधि एवं न्याय मंत्रालय से सवाल पूछे कि वह न्यायपालिका से संबंधित मामलों में क्या कर रहा है। बैठक में न्याय विभाग के सचिव ने उच्च न्यायपालिका के न्यायाधीशों के लिए आचार संहिता के मुद्दों और न्यायाधीशों द्वारा सेवानिवृत्ति के बाद कार्यभार संभालने के संबंध में 'न्यायिक प्रक्रियाओं और उनके सुधार' पर एक प्रस्तुति दी थी।

हटाने का प्रस्ताव अबतक क्यों नहीं

सूत्रों के अनुसार, सदस्यों ने न्यायाधीशों की आचार संहिता पर उठाए गए विभिन्न मुद्दों और चिंताओं पर गौर करते हुए एक व्यापक विधेयक की भी मांग की। सांसदों ने सवाल किया कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास से बेहिसाब नकदी की बरामदगी के मामले पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई और उन्होंने आचार संहिता लागू करने की मांग की। कुछ सांसदों ने यह भी पूछा कि न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने का कोई प्रस्ताव अब तक क्यों नहीं लाया गया है। सूत्रों ने कहा कि कुछ लोगों की यह मांग थी कि कार्रवाई न्यायसंगत होना चाहिए क्योंकि एक छोटे से भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक सरकारी कर्मचारी को अपनी नौकरी गंवानी पड़ सकती है, लेकिन बेहिसाब नकदी की बरामदगी के बाद भी न्यायपालिका के एक वरिष्ठ सदस्य के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है।

भाषा की रिपोर्ट

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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