जलगांव ट्रेन हादसे में एक और सवाल का जवाब मिल गया है। हादसे के बाद कहा जा रहा था कि कर्नाटक एक्सप्रेस के चालक को ट्रैक पर यात्री क्यों नहीं दिखे, जिसके कारण वो देर से ब्रेक लगा पाए। अगर ब्रेक पहले लग जाता तो हादसा टल सकता था या हताहतों की संख्या में कमी आ सकती था। इस सवाल का जवाब है ट्रैक का घटनास्थल पर घुमावदार होना। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस खंड पर ट्रेन 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से चलती हैं।
दोनों चालकों ने किया प्रोटोकॉल का पालन
कर्नाटक एक्सप्रेस की दृश्यता प्रथम दृष्टया घुमावदार पटरियों के कारण प्रभावित हुई, जिसकी चपेट में आने से महाराष्ट्र के जलगांव जिले में बुधवार शाम कम से कम 12 यात्रियों की मौत हो गई। रेलवे अधिकारियों ने यह जानकारी दी। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि दोनों रेलगाड़ियों के चालकों ने दिशानिर्देश (प्रोटोकॉल) का पालन किया और दुर्घटना को टालने की पूरी कोशिश की।
क्यों हो गया हादसा
मध्य रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुष्पक एक्सप्रेस के चालक ने नियम के अनुसार ‘फ्लैशर लाइट’ चालू कर दी थी, जब ट्रेन मुंबई से करीब 400 किलोमीटर दूर माहेजी और परधाडे स्टेशनों के बीच रुकी। उन्होंने बताया कि कर्नाटक एक्सप्रेस के चालक ने पुष्पक एक्सप्रेस के ‘फ्लैशर लाइट सिग्नल’ को देखने के बाद ब्रेक लगाए। उन्होंने प्रारंभिक जानकारी का हवाला देते हुए कहा, ‘‘हालांकि, पटरियों के घुमावदार होने के कारण ट्रेन (कर्नाटक एक्सप्रेस) की दृश्यता और इसके ब्रेक लगने की दूरी प्रभावित हुई।’’
