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कौन हैं मोहन चरण मांझी? जो बनेंगे ओडिशा के नए मुख्यमंत्री, BJP ने किसान पर जताया भरोसा

Who is Mohan Manjhi: मोहन चरण माझी को भारतीय जनता पार्टी के उन दिग्गज नेताओं में गिना जाता है, जिन्होंने ओडिशा में पार्टी की पकड़ मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। वो पहली बार वर्ष 2000 में ओडिशा के क्योंझर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। आपको उनके बारे में बताते हैं।

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मोहन चरण मांझी को जानिए।

Photo : Times Now Digital

Mohan Charan Manjhi Profile: क्या आप जानते हैं कि ओडिशा के होने वाले नए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी कौन हैं, उनका नाता कहां से हैं, उनके परिवार में कौन-कौन है? भारतीय जनता पार्टी ने ओडिशा में अपने पहले मुख्यमंत्री के तौर पर मोहन मांझी के नाम की घोषणा की है। वो पेशे से एक किसान रहे हैं और ओडिशा के क्योंझर विधानसभा सीट से चौथी बार विधायक चुने गए हैं।

पहली बार कब विधायक बने थे मोहन मांझी

मोहन चरण माझी को भारतीय जनता पार्टी के उन दिग्गज नेताओं में गिना जाता है, जिन्होंने ओडिशा में पार्टी की पकड़ मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। वो पहली बार वर्ष 2000 में ओडिशा के क्योंझर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद 2004 में उन्होंने अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा।

लगातार दूसरी बार हासिल की जीत

मोहन चरण मांझी ने 2019 के ओडिशा विधान सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप में क्योंझर (ओडिशा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र) से जीत हासिल की थी। विपक्ष में रहते हुए मांझी ने ओडिशा विधानसभा में बेबाक अंदाज में आवाज उठाई। अब उनके हाथों में सत्ता की कमान होगी।

मोहन चरण मांझी का व्यक्तिगत जीवन

ओडिशा में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के लिए नामित मोहन चरण माझी का जन्म 6 जनवरी 1972 को हुआ था। उनकी आयु फिलहाल 52 वर्ष है। मोहन मांझी एक आदिवासी हैं और पेशे से एक किसान रहे हैं।

भाजपा विधायक दल की बैठक में फैसला

ओडिशा के मुख्यमंत्री का चयन करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक दल की बैठक में मंगलवार को ये फैसला हुआ कि मोहन चरण मांझी ओडिशा में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री होंगे। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और भूपेंद्र यादव बैठक में पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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