लगभग 600 ईसा पूर्व के समय भारत का उत्तरी क्षेत्र 16 स्वतंत्र राज्यों में बंटा हुआ था, जिन्हें महाजनपद कहा जाता था। इनमें अवंती, अंग, मगध, वत्स, काशी, कोसल, सौरसेन, पांचाल, कुरु, मत्स्य, छेदी, गांधार, कंबोज, अस्मक, विज्जी और मल्ल शामिल थे। इन सभी महाजनपदों में से मगध सबसे अधिक संगठित और शक्तिशाली राज्य के रूप में उभरा और धीरे-धीरे एक महाशक्ति साम्राज्य बन गया।
हर्यंक वंश ने मगध साम्राज्य की स्थापना की थी। हर्यंक वंश मगध के पहले शासक थे। हर्यंक वंश की स्थापना बिम्बिसार ने की थी, जिन्हें प्राचीन भारत के महानतम शासकों में से एक माना जाता है। इस वंश ने मगध क्षेत्र के राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो बाद में मौर्य साम्राज्य का केंद्र बन गया।
मगध साम्राज्य की पहली राजधानी पाटलिपुत्र (आज का पटना) नहीं था। मगध की पहली राजधानी गिरिव्रज या राजगृह थी। राजगृह (अब राजगीर) मगध साम्राज्य की प्राचीन राजधानी थी, जो बिहार के नालंदा जिले में स्थित है और बौद्ध व जैन धर्म के लिए एक पवित्र स्थल है। यह प्राचीन शहर कभी जरासंध के राज्य की भी राजधानी थी।
बिम्बिसार के शासनकाल में मगध महाजनपदों में एक प्रमुख महाशक्ति बनकर उभरा। राजनीतिक सुदृढ़ता के लिए उन्होंने वैवाहिक गठबंधनों की नीति अपनाई और साथ ही युद्ध, विस्तार और विजय के मार्ग पर आगे बढ़े। बिम्बिसार ने अंग को कई बार पराजित किया। उनके शासन में मगध का प्रशासन, सैन्य व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और न्याय प्रणाली अत्यंत मजबूत और प्रभावी हो गई।
भारत का पहला सम्राट राजा बिम्बिसार को माना जाता है, जिन्होंने मगध साम्राज्य की स्थापना की थी। राजा बिम्बिसार ने 544 ईसा पूर्व में मगध साम्राज्य की स्थापना की। उन्होंने 544 ईसा पूर्व से 492 ईसा पूर्व तक बावन वर्षों से अधिक समय तक शासन किया।
मगध साम्राज्य के सबसे प्रमुख 7 राजवंशों में शामिल हैं - बृहद्रथ वंश, प्रद्योत वंश, हर्यंक वंश, शिशुनाग वंश, नंद वंश, मौर्य वंश और शुंग वंश। मौर्य वंश के समय में मगध सबसे शक्तिशाली बना और इसकी सीमा वर्तमान भारत, पाकिस्तान और बांग्लेदेश से भी आगे रही।
सोलह महाजनपदों में मगध साम्राज्य सबसे अधिक शक्तिशाली और विकसित राज्य के रूप में उभरा। इसके प्रारंभिक शासकों से लेकर अंतिम राजा धनानंद तक मगध का प्रभुत्व बना रहा। मगध की राजनीतिक परंपरा के आधार पर आगे चलकर मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ और उसके बाद गुप्त साम्राज्य की स्थापना हुई। मगध पर अनेक शासकों ने शासन किया, जिनमें बिम्बिसार, अजातशत्रु, उदयिन, शिशुनाग, कालाशोक, महापद्मानंद और धनानंद प्रमुख थे। मगध साम्राज्य के उत्थान के पीछे भौगोलिक अनुकूलता, राजनीतिक दूरदर्शिता, आर्थिक समृद्धि और मजबूत सैन्य शक्ति जैसे मुख्य कारण रहे।