Gig Workers News: गिग और प्लेटफॉर्म सेवा कर्मियों ने अपने अधिकारों, सुरक्षा और स्थायी रोजगार की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने बताया कि 26 जनवरी 2026 को कर्मचारी ऐप बंद कर ऑनलाइन हड़ताल करेंगे, जबकि 3 फरवरी 2026 को देशभर में प्रत्यक्ष प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इस आंदोलन का नेतृत्व बड़ी संख्या में महिला गिग वर्कर्स करेंगी, जो कार्यस्थल पर सुरक्षा, सम्मान और समान अधिकारों की मांग को प्रमुखता से उठाएंगी।
यूनियन का कहना है कि देशभर में लाखों गिग वर्कर्स ऐप आधारित कंपनियों से जुड़े हुए हैं और वे परिवहन, फूड डिलीवरी, घरेलू सेवाएं, लॉजिस्टिक्स, ई कॉमर्स, ब्यूटी और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें श्रमिक का दर्जा नहीं दिया गया है और वे लगातार असुरक्षा, अनिश्चित आय और मनमानी नीतियों का सामना कर रहे हैं।
महिलाओं वर्कर्स के सामने ज्यादा हैं चुनौतियां
यूनियन के अनुसार, महिला गिग वर्कर्स को अन्य कर्मियों की तुलना में अधिक जोखिम और समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में जब महिलाएं उचित भुगतान की मांग करती हैं तो उन्हें अपमान, धमकी और कभी कभी हिंसा तक झेलनी पड़ती है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें महिला कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं देखी जा सकती हैं।
महिला कर्मियों की शिकायत है कि जब वे इन मामलों की रिपोर्ट कंपनियों को करती हैं तो अक्सर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। कई बार शिकायत करने के बाद उनकी आईडी ही ब्लॉक कर दी जाती है, जिससे उनकी आजीविका छिन जाती है। यूनियन का कहना है कि यह स्थिति न केवल असंवेदनशील है बल्कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के अधिकारों का भी उल्लंघन है।
मनमानी आईडी ब्लॉकिंग और आय की असुरक्षा
गिग वर्कर्स की सबसे बड़ी शिकायतों में मनमाने तरीके से आईडी ब्लॉक किया जाना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि बिना स्पष्ट कारण या सुनवाई का अवसर दिए उन्हें काम से हटा दिया जाता है। इससे उनकी आय अचानक बंद हो जाती है और परिवार की आजीविका संकट में पड़ जाती है। यूनियन का आरोप है कि कंपनियों द्वारा अपनाए जा रहे ऑटो असाइन सिस्टम, रेटिंग सिस्टम और बंडल बुकिंग जैसी व्यवस्थाएं पारदर्शी नहीं हैं और इनके जरिए श्रमिकों पर अतिरिक्त दबाव बनाया जाता है।
इसके अलावा, आय दरों में लगातार कटौती, अग्रिम शुल्क और जुर्मानों की वजह से गिग वर्कर्स की आमदनी पहले से भी अस्थिर हो गई है। कई कर्मचारी बताते हैं कि काम का समय बढ़ने के बावजूद उनकी कमाई घटती जा रही है। यूनियन का कहना है कि जब कंपनियां एकतरफा नियम बदल देती हैं तो श्रमिकों से कोई सलाह मशविरा नहीं किया जाता, जिससे असंतोष और असुरक्षा बढ़ती है।
सरकार से केंद्रीय कानून की उठाई मांग
गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने सरकार से गिग वर्कर्स के लिए एक अलग और व्यापक केंद्रीय कानून बनाने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि जब तक उन्हें श्रमिक का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक उन्हें सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, बीमा और कानूनी संरक्षण जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी। इसके अलावा, वे मनमानी आईडी ब्लॉकिंग पर रोक, शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था और काम की शर्तों में बदलाव से पहले कर्मचारियों से परामर्श की व्यवस्था चाहते हैं।
यूनियन ने यह भी मांग की है कि महिलाओं के लिए ऐप में आपातकालीन सहायता बटन, सुरक्षित कार्यस्थल व्यवस्था और यौन उत्पीड़न से सुरक्षा से जुड़े कानूनों के प्रभावी पालन को सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही, कार्य क्षेत्र और दूरी की सीमा तय करने तथा दोहरी कैंसिलेशन पेनल्टी जैसी व्यवस्थाओं को खत्म करने की भी मांग की गई है।
देशभर में एकजुट प्रदर्शन की तैयारी
यूनियन के अनुसार, 26 जनवरी को गिग वर्कर्स अपने ऐप बंद कर ऑनलाइन विरोध दर्ज कराएंगे, ताकि सरकार और कंपनियों का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचा जा सके। इसके बाद 3 फरवरी को देशभर के प्रमुख शहरों और कस्बों में प्रत्यक्ष प्रदर्शन किए जाएंगे। इन प्रदर्शनों में महिला कर्मियों की भागीदारी प्रमुख होगी और वे अपनी सुरक्षा, सम्मान और आजीविका से जुड़े मुद्दों को सामने रखेंगी।
यूनियन ने सांसदों, ट्रेड यूनियनों, महिला संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों से इस आंदोलन को समर्थन देने की अपील की है। उनका कहना है कि गिग वर्कर्स की समस्याएं केवल रोजगार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सम्मानजनक जीवन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक न्याय से भी जुड़ी हुई हैं। आंदोलन के जरिए कर्मचारी यह संदेश देना चाहते हैं कि ऐप आधारित अर्थव्यवस्था में काम करने वाले लाखों लोग अदृश्य श्रमिक नहीं हैं, बल्कि वे भी अधिकारों और सुरक्षा के हकदार हैं।
