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क्या संसद में पास होते ही लागू हो जाएगा महिला आरक्षण? या अभी करना होगा और इंतजार, यहां जानें सबकुछ

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 19, 2023, 04:38 PM IST

Women Reservation Bill: अगर आपको लग रहा है कि 2024 के चुनाव में ही इसे लागू कर दिया जाएगा.. तो ऐसा नहीं है। महिलाओं को अभी लंबा इंतजार करना होगा। शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है कि आपने दरवाजे तो खोल दिए हैं लेकिन दरवाजों पर महिलाओं के लिए अभी भी 'नो एंट्री' है।

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महिला आरक्षण विधेयक

Photo : ANI

Women Reservation Bill: नए संसद भवन में प्रवेश करने के साथ ही आज का दिन महिलाओं के लिए भी ऐतिहासिक हो गया। संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को पेश किया है। केंद्र सरकार ने इस बिल को नारी शक्ति वंदन अधिनियम नाम दिया है। इस बिल में लोकसभा और विधानसभाओं में 33% सीटों महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है।

अब केंद्र सरकार लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल को पास कराने की कोशिश करेगी, जिसके बाद यह बिल कानून की शक्ल ले लेगा और लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाएंगी। यानी लोकसभा और विधानसभा में हर तीसरा सांसद या विधायक महिला होगी। हालांकि, अगर आपको लग रहा है कि 2024 के चुनाव में ही इसे लागू कर दिया जाएगा.. तो ऐसा नहीं है। महिलाओं को अभी लंबा इंतजार करना होगा।

2029 के चुनाव में हो सकता है लागू

नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2029 के चुनाव में लागू हो सकता है। दरअसल, इस कानून को अगले परिसीमन के बाद ही लागू किया जाएगा। यह परिसीमन 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के बाद आयोजित किया जा सकता है। इसके बाद अगले लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जा सकती हैं। इस मुद्दे को उद्धव गुट की शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी उठाया है। उन्होंने कहा, मैं उम्मीद करती हूं कि यह तुरंत लागू होगा लेकिन बिल में यह लिखा है कि यह परिसीमन के बाद ही लागू होगा। इसका यह मतलब हुआ कि यह आरक्षण 2029 तक लागू नहीं हो सकता। आपने दरवाजे तो खोल दिए हैं लेकिन दरवाजों पर महिलाओं के लिए अभी भी 'नो एंट्री' है।

क्या राज्यसभा में भी महिलाओं को मिलेगा आरक्षण

महिला आरक्षण बिल में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत कोटे की व्यवस्था सिर्फ लोकसभा और विधानसभाओं में ही की गई है। यह आरक्षण राज्यसभा और विधान परिषदों पर लागू नहीं होगा। वहीं, एससी और एसटी महिलओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था इसी बिल के अंदर की गई है, उन्हें अलग से आरक्षण नहीं मिलेगा। आरक्षित कोटे में से एक तिहाई अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए सीटे आरक्षित होंगी। वहीं ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था नहीं की गई है।

लोकसभा की कितनी बदलेगी तस्वीर

अभी लोकसभा में 82 महिला सांसद हैं। यह बिली जब कानून बन जाएगा तो लोकसभा में महिलाओं के लिए 181 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यानी कम से कम 181 सांसद महिलाएं होंगी। इस बिल को लाने का उद्देश्य यह है कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया जा सके।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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