MAVEN का पूरा नाम है Mars Atmosphere and Volatile Evolution। यह NASA का एक अंतरिक्ष मिशन है, जिसे मंगल ग्रह (Mars) के वातावरण का अध्ययन करने के लिए भेजा गया था। NASA ने MAVEN अंतरिक्ष यान नवंबर 2013 में लॉन्च किया था और सितंबर 2014 में इसने मंगल की कक्षा में प्रवेश किया। इस मिशन का उद्देश्य मंगल के ऊपरी वायुमंडल, आयनमंडल और सूर्य तथा सौर पवन के साथ इसकी अंतःक्रियाओं का अध्ययन करना है, ताकि अंतरिक्ष में मंगल के वायुमंडल के क्षरण का पता लगाया जा सके।
मेवेन स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष यान मंगल की सतह पर मौजूद रोवरों के लिए संचार रिले स्टेशन के रूप में भी कार्य करता है। पिछले वर्ष, MAVEN ने मंगल की कक्षा में अपनी 10वीं वर्षगांठ मनाई थी।
मंगल ग्रह की कक्षा में मौजूद नासा के मेवेन अंतरिक्ष यान का पृथ्वी पर स्थित ग्राउंड स्टेशनों से 6 दिसंबर को संपर्क टूट गया। मेवेन से प्राप्त टेलीमेट्री डेटा से पता चला था कि मंगल के पीछे परिक्रमा करने से पहले इसके सभी उप-प्रणालियां सामान्य रूप से काम कर रही थीं। अंतरिक्ष यान के मंगल के पीछे से निकलने के बाद, नासा के डीप स्पेस नेटवर्क को कोई संकेत नहीं मिला।
दरअसल जब कोई स्पेसक्राफ्ट परिक्रमा के दौरान जब कभी पिछले हिस्से में पहुंचता है तो वापस आने पर उससे संपर्क जुड़ जाता है, लेकिन MAVEN के साथ ऐसा नहीं हुआ। नासा के वैज्ञानिकों की संपर्क साधने की सभी कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं।
MAVEN से यह अहम जानकारी मिली कि मंगल के ऊपरी वायुमंडल से गैसें लगातार अंतरिक्ष में जा रही हैं। इसके पीछे प्रमुख कारण सौर हवा (Solar Wind) और सूर्य की तीव्र ऊर्जा है। इसी वजह से मंगल आज ठंडा, शुष्क और जीवन के लिए कठिन ग्रह बन गया। MAVEN के डेटा से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली कि कभी मंगल पर पानी और जीवन के अनुकूल हालात कैसे हो सकते थे और वे परिस्थितियां क्यों खत्म हो गईं। MAVEN ने मंगल के अतीत, उसके वातावरण और ग्रहों के विकास को समझने में बड़ी भूमिका निभाई।
NASA के Deep Space Network (DSN) के जरिए MAVEN संपर्क में रहता था। इसमें अमेरिका, स्पेन और ऑस्ट्रेलिया में मौजूद विशाल एंटेना शामिल हैं। अभी तक कभी-कभी तकनीकी कारणों या सौर गतिविधि के चलते अस्थायी संचार बाधा आई थी, लेकिन MAVEN से संपर्क स्थायी रूप से नहीं टूटा था।
मंगल के पिछले हिस्से में उसका खोता हुआ वायुमंडल फैला हुआ है, जो एक अदृश्य लेकिन बहुत बड़ी पूंछ की तरह अंतरिक्ष में फैलता है। सूर्य से आने वाली सौर हवा मंगल के वायुमंडल से टकराकर: हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और अन्य हल्की गैसों को उड़ा ले जाती है। ये गैसें मिलकर मंगल के पीछे अंतरिक्ष में फैली हुई एक पूंछ बनाती हैं।