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बंगाल में नहीं थम रहे महिलाओं के खिलाफ अपराध, अब अस्पताल में नर्स से छेड़छाड़

West Bengal News: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के एक सरकारी अस्पताल में नर्स के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि एक पुरुष मरीज ने ड्यूटी पर तैनात नर्स के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ और गाली-गलौज की।

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बंगाल में नर्स से छेड़छाड़।

Photo : iStock

West Bengal News: पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की चौंकाने वाली घटना के कुछ सप्ताह बाद पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के एक सरकारी अस्पताल में नर्स के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि एक पुरुष मरीज ने ड्यूटी पर तैनात नर्स के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ और गाली-गलौज की।

बीरभूम के मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओएच) हिमाद्री बारी ने बताया शनिवार देर रात तेज बुखार से पीड़ित एक व्यक्ति ने इलमबाजार ब्लॉक अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद नर्स के साथ बदसलूकी करने की कोशिश की। अस्पताल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसने उसे गिरफ्तार कर लिया और इलाज के लिए बोलपुर उपमंडल अस्पताल भेज दिया। नर्स ने कहा, मरीज ने आते ही मुझे गाली देना शुरू कर दिया। मैंने उसे अनदेखा किया और उसका इलाज शुरू कर दिया, लेकिन जब मैं सलाइन लगा रही थी तो अचानक उसने मुझे गलत तरीके से छुआ।

नाबालिग से छेड़छाड़ पर भीड़ ने घर में की तोड़फोड़

वहीं, पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में 10 वर्षीय एक लड़की से कथित तौर पर छेड़छाड़ करने के आरोप में भीड़ ने एक पंचायत सदस्य के घर में तोड़फोड़ की। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपी को रविवार सुबह गिरफ्तार कर लिया गया और जिले की रोहांडा पंचायत के राजबाड़ी इलाके में पुलिस तैनात कर दी गई है। शनिवार शाम को लड़की के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई। लड़की ने अपने परिवार के सदस्यों को अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने आरोपी को पकड़ लिया। अधिकारी ने बताया कि आरोपी की प्रतिक्रिया से गुस्साई भीड़ ने उसके घर और इलाके में उसके भाई की दुकान में तोड़फोड़ की। उन्होंने कहा कि पुलिस को भीड़ को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े। उधर, रविवार को अस्पताल के डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने चौबीसों घंटे सुरक्षा की मांग को लेकर रैली निकाली। रैली में भाग लेने वाली एक नर्स ने कहा, आरजी कर की घटना के बावजूद, हमारी सुरक्षा के संबंध में ज्यादा कुछ नहीं बदला है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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