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बंगाल में OBC आरक्षण पर सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी का फैसला पलटा, लिस्ट से मुस्लिमों को किया बाहर, पढ़ें- नए समीकरण

OBC Reservation in West Bengal: कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश के अनुपालन में नई अधिसूचना जारी की गई, जिसमें पश्चिम बंगाल में कई समुदायों के OBC दर्जे को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया गया था।

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बंगाल में OBC आरक्षण पर सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी का फैसला पलटा, लिस्ट से मुस्लिमों को किया बाहर

West Bengal OBC Reservation: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली BJP सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पश्चिम बंगाल में जातिगत समीकरण बदल दिए हैं। सुवेंदु सरकार ने मंगलवार को 66 समुदायों को नियमित कर दिया। ये समुदाय 2010 से पहले राज्य की OBC आरक्षण सूची में शामिल थे। यह फैसला नई सरकार द्वारा मौजूदा राज्य OBC सूची को रद्द किए जाने के कुछ ही दिनों बाद आया है। इस अधिसूचना के साथ, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने कहा कि ये समुदाय जिनमें से कई मुस्लिम हैं, वे अब सरकारी सेवाओं और पदों में 7 प्रतिशत आरक्षण के पात्र होंगे।

सूची में कपाली, कुर्मी, नाई (नेपित), तांती, धानुक, कसाई, खंडैत, तुरहा, पहाड़िया मुस्लिम, देवंगा, हज्जाम (मुस्लिम) जैसे कई पारंपरिक और सामाजिक समुदाय शामिल हैं। अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि जिन व्यक्तियों ने अनुसूचित जातियों से ईसाई धर्म अपनाया है, उन्हें और उनके वंशजों को इस सूची में शामिल किया गया है।

2024 के आदेश के बाद नियमितीकरण

यह अधिसूचना मई 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट के एक आदेश के पालन में जारी की गई थी, जिसमें पश्चिम बंगाल के कई समुदायों के OBC दर्जे को रद्द कर दिया गया था और इसे अवैध करार दिया गया था।

कोर्ट ने 'पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा) (सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण) अधिनियम, 2012' के तहत नामित कई वर्गों को रद्द कर दिया।

इसने श्रेणी-वार OBC आरक्षण संरचना को भी समाप्त कर दिया- श्रेणी A (अधिक पिछड़े वर्ग) के लिए 10 प्रतिशत और श्रेणी B (पिछड़े वर्ग) के लिए 7 प्रतिशत। इस फैसले के बाद, राज्य में कुल OBC आरक्षण 7 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है।

राज्य पर इसके प्रभाव

BJP सरकार ने कहा कि इस फैसले का मकसद अदालत के निर्देशों के मुताबिक सामाजिक न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से OBC समूहों के बीच मुकाबला तेज हो सकता है, जिससे राज्य में आरक्षण के परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव आ सकता है। उनका यह भी कहना है कि इससे भविष्य में राज्य सरकार पर आरक्षण का एक नया ढांचा तैयार करने का दबाव बढ़ सकता है।

तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा जारी OBC सूची में OBC-A और OBC-B श्रेणियों के तहत कुल 140 उप-समूह शामिल थे, जिनमें से 80 मुस्लिम समुदाय से थे। हालांकि, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस कदम पर रोक लगा दी थी, जिसे बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने हटा दिया। इस महीने की शुरुआत में, विधानसभा चुनावों में भारी बहुमत हासिल करने के बाद BJP ने पश्चिम बंगाल में पहली बार सरकार बनाई।

मुस्लिम समुदाय से कई श्रेणियां बाहर, 2010 वाला फॉर्मूला लागू

ममता सरकार के समय 2010 के बाद जिन जातियों और समुदायों को OBC यानी अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में जोड़ा गया था, अब उन्हें नई व्यवस्था में बाहर कर दिया गया है। इनमें कई मुस्लिम समुदाय भी शामिल बताए जा रहे हैं।

नई अधिसूचना के मुताबिक अब राज्य में वही OBC सूची लागू होगी, जो 2010 से पहले प्रभावी थी। इसी आधार पर सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण दिया जाएगा। इस बदलाव के बाद अब केवल 66 जातियों और वर्गों को ही 7 प्रतिशत OBC आरक्षण का लाभ मिलेगा।

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, 2010 से पहले लागू सूची पर कभी कोई न्यायिक आपत्ति नहीं आई थी। सरकार का कहना है कि पुरानी व्यवस्था को दोबारा लागू करने का उद्देश्य आरक्षण प्रणाली को कानूनी रूप से मजबूत और पारदर्शी बनाना है।

दरअसल, पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। 2010 से पहले OBC सूची सीमित थी और उसमें उन्हीं समुदायों को शामिल किया जाता था, जिनके सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के ठोस आंकड़े मौजूद हों। साथ ही कानूनी और प्रशासनिक जांच के बाद ही किसी जाति को सूची में जगह मिलती थी।

लेकिन 2010 के बाद बड़ी संख्या में नई जातियों और समुदायों को OBC सूची में जोड़ा गया। उस समय विपक्ष में BJP लगातार आरोप लगाती रही कि इनमें कई मुस्लिम समुदायों को राजनीतिक कारणों से शामिल किया गया।

अब सरकार ने साफ किया है कि नई सूची से किसी समुदाय को धार्मिक आधार पर नहीं हटाया गया, बल्कि उन समुदायों को बाहर किया गया है जिनका समावेशन बाद में हुआ था और जिन पर अदालतों में सवाल उठे थे। यही वजह है कि 2010 के बाद OBC दर्जा पाने वाले कई मुस्लिम समुदाय अब अंतिम सूची में शामिल नहीं हैं।

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Nitin Arora
नितिन अरोड़ा author

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदे... और देखें

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