पश्चिम एशिया संघर्ष के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय तैयारी और समन्वय को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर कदम तेज कर दिए हैं। सरकार ने इस बाबत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में एक गैर-औपचारिक मंत्री समूह (IGOM) बनाया है। इस समूह में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और हरदीप पुरी जैसे वरिष्ठ मंत्री शामिल हैं। यह समूह युद्ध के आर्थिक, ऊर्जा-संबंधी और सुरक्षा प्रभावों पर लगातार समीक्षा करेगा।
पीएम मोदी ने की सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों संग वार्ता
इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गैर-चुनाव वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक कर राज्यों की तैयारियों का आकलन किया। पीएम ने ‘टीम इंडिया’ भाव से सामूहिक प्रयासों पर जोर देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया संकट लंबे समय तक चल सकता है,इसलिए देश को कोविड काल की तरह ही एकजुट और सतर्क रहना होगा।
बैठक में तेल, गैस, उर्वरक, आंतरिक सुरक्षा और प्रवासी भारतीयों पर पड़ रहे प्रभावों पर चर्चा हुई। पीएम ने संभावित गलत सूचनाओं, कालाबाज़ारी और जमाखोरी को रोकने के लिए राज्यों को सख्त निगरानी के निर्देश दिए।
इसके साथ ही केंद्र ने पहले से गठित सात एम्पावर्ड ग्रुप्स के कार्यों की भी समीक्षा की,जो संकट के दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने के लिए बनाई गई थी। सरकार का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और सीमा, तटीय, साइबर व रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है। पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक तेल बाज़ार को झटका दिया है, जिसके असर भारत सहित पूरी दुनिया में महसूस किए जा रहे हैं।
ईरान पर हमले के बाद से जारी है अस्थिरता
पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव से उत्पन्न होने वाले मुद्दों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। अमेरिका-इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी हमले किए। इसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज हो गया।संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, जिसमें तेल और गैस की कीमतें भी शामिल हैं, जिसका असर देश भर के नागरिकों के जीवन पर पड़ा है।
पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कमी को लेकर अफवाहें
ईरान-इजराइल युद्ध के बीच कई देशों में ईधन को लेकर अस्थिरता का माहौल है। भारत में भी पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कमी को लेकर अफवाहें फैलने लगी हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन और एलपीजी की सप्लाई सामान्य है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। गुरुवार को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पेट्रोल, डीज़ल, एलपीजी और PNG को लेकर फैल रही अफवाहों पर बड़ा बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि देश में ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। मंत्रालय ने कहा कि पेट्रोल-डीजल का 60 दिनों का स्टॉक है और LPG की महीनेभर सप्लाई प्रभावित नहीं होगी, जबकि PNG की कहीं भी कोई कमी नहीं है और सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
