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कौन हैं यूपी के सुपर कॉप इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा, वेब सिरीज में रणदीप हुड्डा निभाएंगे जिनका किरदार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 23, 2023, 11:43 PM IST

Inspector Avinash Web Series: ये अनिवाश मिश्रा (Who is Avinash Mishra)कौन हैं? वह उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) में कब शामिल हुए? पश्चिम यूपी के दुर्दांत माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला (Shri Prakash Shukla) के एनकाउंटर से उनका नाम क्यों जोड़ा जा रहा है? और किस एनकाउंटर के लिए उन्हें सम्मानित किया गया था?

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Web Series Inspector Avinash

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Inspector Avinash Web Series : बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा (Randeep Hooda ) की वेब सीरीज इंस्पेक्टर अविनाश (Web Series Inspector Avinash) इन दिनों चर्चा में है। यह वेब सीरीज ओटीटी(OTT) प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो चुकी है, जिसमें रणदीप हुड्डा (Randeep Hooda) उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) के एनकाउंटर स्पेश्लिस्ट इंस्पेक्ट अनिवाश मिश्रा (Encounter Specialist Avinash Mishra) का किरदार निभा रहे हैं। वेब सीरीज (Web Series) में रणदीप हुड्डा एक दबंग पुलिस वाले की भूमिका हैं और कई कुख्यात बदमाशों से लोहा लेते हुए दिख रहे हैं।

इस वेब सीरीज के साथ इस बात की भी चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर ये अनिवाश मिश्रा (Who is Avinash Mishra)कौन हैं? वह उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) में कब शामिल हुए? पश्चिम यूपी के दुर्दांत माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला (Shri Prakash Shukla) के एनकाउंटर से उनका नाम क्यों जोड़ा जा रहा है? और किस एनकाउंटर के लिए उन्हें सम्मानित किया गया था? ऐसे में आगे हम जानेंगे रियल लाइफ के अनिवाश मिश्रा के बारे में, इस आर्टिकल के जरिए आइए मिलते हैं उनसे...

हमीरपुर में हुआ था अविनाश मिश्रा का जन्म

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनिवाश मिश्रा का जन्म उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में हुआ था। उन्होंने फिजिकल एजुकेशन से पोस्ट ग्रेजुएट किया और इसके बाद 1982 में वह बतौर सब-इंस्पेक्टर उत्तर प्रदेश पुलिस में शामिल हुए थे। अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के लिए अनिवाश मिश्रा की पहली पोस्टिंग मेरठ में हुई थी। वह STF के फाउंडर मेंबर भी रहे हैं। इसके बाद उन्होंने ATS ज्वाइन किया और 2019 में डिप्टी एसपी रैंक से रिटायर हो गए।

शुरु से निडर, पहले साल ही किए 3 एनकाउंटर

जानकारी के मुताबिक, अनिवाश मिश्रा की छवि काफी निडर पुलिस वाले के तौर पर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अविनाश मिश्रा ने अपनी तैनाती के पहले साल ही तीन एनकाउंटर कर दिए थे, जिसके बाद उनका नाम काफी चर्चा में आ गया। कहा जाता है कि एनकाउंटर स्पेश्लिस्ट अनिवाश मिश्रा ने अपने पूरे करियर में 150 से ज्यादा एनकाउंटर किए हैं, इसके लिए उन्हें समय-समय पर सम्मानित भी किया गया।

श्रीप्रकाश शुक्ला और मुन्ना बजरंगी को किया ढेर

अनिवाश मिश्रा ने पूर्वांचल के माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला और मुन्ना बजरंगी जैसे अपराधिकयों का भी एनकाउंटर किया है। ये दोनों वे माफिया थे, जिनके नाम से एक समय बड़े-बड़े अधिकारी तक थर्राते थे। कहा जाता है कि श्रीप्रकाश शुक्ला से अनिवाश मिश्रा का कई बार आमना-सामना हुआ, लेकिन हर बार वो बचकर भाग निकला। आखिरकार 22 सितंबर 1998 को श्रीप्रकाश शुक्ला उनकी गोलियों का शिकार हो ही गया। श्रीप्रकाश शुक्ला का एनकाउंटर करने वाली टीम में राजेश पांडेय, अनिवाश मिश्रा समेत पांच लोग थे, जिन्हें बाद में प्रेसिडेंट मेडल भी मिला था। इसके अलावा अनिवाश मिश्रा ने सत्तू पांडेय, सचिन पहाड़ी, अवधेश शुक्ला, अशोक सिंह, महेंद्र फौजी जैसे अपराधियों का भी खात्मा किया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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