Warmer February Expected: जनवरी में गर्म और शुष्क मौसम के बाद फरवरी में भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान और सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। फरवरी में बारिश दीर्घावधि औसत (1971-2020) 22.7 मिमी के 81 प्रतिशत से कम होने की आशंका है। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि पश्चिम-मध्य, प्रायद्वीपीय और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है।
फरवरी में न्यूनतम तापमान रहेगा अधिक
मौसम विभाग ने बताया कि उत्तर-पश्चिम और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में फरवरी में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का पू्र्वानुमान है। महापात्रा ने बताया कि इसी तरह पश्चिम-मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। उन्होंने बताया कि भारत में जनवरी में औसतन 4.5 मिलीमीटर (मिमी) बारिश हुई, जो 1901 के बाद से चौथी बार और 2001 के बाद तीसरी बार सबसे कम बारिश दर्ज की गयी।
जनवरी में औसत तापमान 18.98 डिग्री सेल्सियस
जनवरी में देश का औसत तापमान 18.98 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1901 के बाद से इस महीने का तीसरा सबसे अधिक तापमान था, जो 1958 और 1990 के बाद सबसे अधिक था। इससे पहले, आईएमडी ने पूर्वानुमान जताया था कि जनवरी से मार्च के बीच उत्तर भारत में वर्षा सामान्य से कम होगी। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सर्दियों (अक्टूबर से दिसंबर) में गेहूं, मटर, चना और जौ जैसी रबी फसलों की खेती होती है और गर्मियों (अप्रैल से जून) में उनकी कटाई की जाती है। मुख्य रूप से पश्चिमी विक्षोभ के कारण सर्दियों में होने वाली वर्षा इन फसलों की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
