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वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी, CJI की अगुवाई वाली पीठ के सामने कपिल सिब्बल दे रहे दलील

SC Hearing On Waqf Amendment Act : वक्फ संशोधन एक्ट पर आज से सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में दायर कई अर्जियों में वक्फ संशोधन कानून के कई प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। बीते दिनों बजट सत्र के अंतिम दिनों में यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ

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सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन एक्ट को चुनौती दी गई है।

SC Hearing On Waqf Amendment Act Today : वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। प्रधान न्यायाधीश की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ मामले की सुनवाई कर रही है। वक्फ कानून का विरोध करने वालों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल दलीलें पेश कर रहे हैं। सिब्बल ने कहा कि यह कानून मुस्लिमों के अधिकारों में खलल है। बहस की शुरुआत करते हुए सिब्बल ने कहा कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन करता है और इसमें कई खामियां हैं। यही नहीं यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने वाला भी है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर कई अर्जियों में वक्फ संशोधन कानून के कई प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। बीते दिनों बजट सत्र के अंतिम दिनों में यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ। मुस्लिम संगठन, मौलवी, सिविल सोसायटी और विपक्षी दल इस कानून का विरोध कर रहे हैं। इनका आरोप है कि इस विधेयक के जरिए सरकार वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है जबकि सरकार का कहना है कि इससे वक्फ की संपत्तियों के प्रबंधन एवं संचालन बेहतर होगा और उसमें पारदर्शिता आएगी।

सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ करेगी सुनवाई

प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार एवं के वी विश्वनाथन की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मुद्दे पर अब तक 10 याचिकाओं को सूचीबद्ध किया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख ओवैसी की याचिका के अलावा, शीर्ष अदालत ने आम आदमी पार्टी (आप) नेता अमानतुल्लाह खान, एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स, अरशद मदनी, समस्त केरल जमीयतुल उलेमा, अंजुम कादरी, तैयब खान सलमानी, मोहम्मद शफी, मोहम्मद फजलुर्रहीम और राजद सांसद मनोज झा द्वारा दायर याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

सपा, टीएमसी, बर्क की याचिका भी शामिल

शीर्ष अदालत में इस मुद्दे पर कई नयी याचिकाएं दायर की गई हैं, जिन्हें अभी सूचीबद्ध किया जाना बाकी है। इन याचिकाओं में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क द्वारा दायर याचिकाएं भी शामिल हैं। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) प्रमुख एवं अभिनेता से नेता बने विजय ने भी इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत का रुख किया है।

हरिशंकर जैन ने भी दी चुनौती

अधिवक्ता हरि शंकर जैन और मणि मुंजाल ने भी एक अलग याचिका दायर कर वक्फ कानून के कई प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को इस आधार पर चुनौती दी है कि वे गैर-मुसलमानों के मौलिक अधिकारों का हनन करते हैं, जिसके बाद प्रधान न्यायाधीश ने इसे सूचीबद्ध करने को सहमत हुए।

केंद्र सरकार ने आठ अप्रैल को न्यायालय में एक ‘कैविएट’ दायर कर विषय में कोई आदेश पारित किए जाने से पहले सुनवाई किए जाने का अनुरोध किया था।

सरकार ने दाखिल की है ‘कैविएट’

‘कैविएट’ किसी पक्षकार द्वारा उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में यह सुनिश्चित करने के लिए दायर की जाती है कि इसे सुने बिना कोई आदेश पारित नहीं किया जाए। केंद्र ने हाल में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को अधिसूचित किया था। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी), जमीयत उलेमा-ए-हिंद, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक), कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और मोहम्मद जावेद अन्य प्रमुख याचिकाकर्ता हैं। सात अप्रैल को प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर विचार करने का आश्वासन दिया था।

एआईएमपीएलबी ने 6 अप्रैल को शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। अधिवक्ता लजफीर अहमद के मार्फत दायर ओवैसी की याचिका में कहा गया है कि वक्फ को दिये गए संरक्षण को कम करना मुसलमानों के प्रति भेदभाव है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 15 का उल्लंघन है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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