वंदे भारत की एल्युमिनियम ट्रेन भारतीय रेलवे के लिए गेम चेंजर साबित होने जा रही है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी (ICF) के पूर्व महाप्रबंधक सुधांशु मणि ऐसा ही मानते हैं। भारतीय रेलवे पहली बार 100 एल्युमिनियम वंदे भारत ट्रेनों का निर्माण करने जा रही है। हाल ही में 30 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को लेकर तकनीकी टेंडर जमा किए गए हैं।
भारतीय रेलवे का चेहरा पूरी तरह बदल जाएगा
सुधांशु मणि को भारत में वंदे भारत ट्रेन शुरू करने का विचार देने के लिए भी जाना जाता है। उनका कहना है कि एल्युमिनियम ट्रेन भारतीय रेलवे का चेहरा पूरी तरह बदल देगी। इसे लेकर दो प्रमुख रेलवे उपकरण मैनुफैक्चरिंग कंपनी स्विट्जरलैंड की स्टेडलर (Stadler) मेधा सर्वो के साथ गठजोड़ करने जा रही है। इसी तरह फ्रांस की कंपनी एल्सटॉम (Alstom) ने भारत में बनने वाली एल्युमिनियम ट्रेन के लिए टेंडर जमा किया है। ये स्लीपर ट्रेनें होंगी।
वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को देश में पहली बार 2019 में दिल्ली-वाराणसी के बीच शुरू किया गया था। तब से 9 और वंदे भारत ट्रेन शुरू की जा चुकी हैं। पहली दो ट्रेन जहां प्रोटोटाइप थीं, रेलवे ने 2022 के मध्य से अपग्रेड ट्रेन लॉन्च करना शुरू कर दिया।
शताब्दी एक्सप्रेस का से बेहतर सुविधाएं
अभी मौजूद वंदे भारत ट्रेन एयर कंडीशन चेयर कार के साथ शताब्दी एक्सप्रेस का से बेहतर सुविधाओं वाली ट्रेन है। सेमी-हाई स्पीड वाली वंदे भारत एक्सप्रेस की स्पीड 160 किमी प्रति घंटे तक है। भारतीय रेलवे को उम्मीद है कि वह स्लीपर वर्जन वाली और अधिक वंदे भारत ट्रेनें शुरू कर पाएगी जिसकी गति 200 किमी प्रति घंटे होगी।
ये ट्रेनें राजधानी एक्सप्रेस का का प्रीमियम वर्जन होंगी और इन्हें आने वाले कुछ वर्षों में शुरू किया जाएगा। इसी के साथ रेलवे एल्युमीनियम ट्रेनों की निर्माण क्षमता हासिल करने की उम्मीद कर रही है जो आज के दौर में विश्व में अपनाई जा रही है।
