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Uttarakhand Tunnel: अमेरिकी मशीनों के लगातार धोखे के बाद अब मैन्युअल ड्रिलिंग के सहारे होगा रेस्क्यू ऑपरेशन!

  • Authored by: शिशुपाल कुमार
  • Updated Nov 25, 2023, 05:51 PM IST

Uttarakhand Tunnel: शनिवार की सुबह एक बड़ी ड्रिलिंग मशीन को सुरंग के ऊपर पहाड़ी की ओर ले जाया गया, जहां वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए विशेषज्ञों ने सबसे कम ऊंचाई वाले दो स्थानों की पहचान की है।

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ऑगर मशीन के टूटे हुए पार्ट्स

Photo : ANI

Uttarakhand Tunnel: उत्तराखंड सुरंग हादसे में अमेरिकी ऑगर मशीनों के लगातार खराब होने के कारण अब रेस्क्यू ऑपरेशन में और देरी होनी तय है। एक के बाद एक कई ऑगर मशीनें मलबे की ड्रिलिंग में टूट चुकी है। कहने को तो मजदूरों और ड्रिलिंग के बीच मुश्किल से 10-15 मीटर की दूरी बची है, लेकिन यहां आकर अब मशीनें बेकार हो गई हैं। जिसके बाद अब मैन्युअल ड्रिलिंग के सहारे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

क्या बोले बचाव अधिकारी

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने शनिवार को कहा कि सिल्कयारा सुरंग में बचाव अभियान में समय लगेगा और अब ध्यान मैन्युअल ड्रिलिंग पर है। एनडीएमए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि ऑगर ड्रिलिंग मशीन के रास्ते में बाधाएं आने के बाद इसमें कोई प्रगति नहीं हुई है। एनडीएमए सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने कहा, "इसे रोक दिया गया है। अब खुदाई का मैनुअल तरीका अपनाया जा रहा है।"

वर्टिकल ड्रिलिंग की भी तैयारी

शनिवार की सुबह एक बड़ी ड्रिलिंग मशीन को सुरंग के ऊपर पहाड़ी की ओर ले जाया गया, जहां वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए विशेषज्ञों ने सबसे कम ऊंचाई वाले दो स्थानों की पहचान की है। बीआरओ ने सुरंग के ऊपर तक 1.5 किलोमीटर लंबी सड़क पहले ही बना दी है, क्योंकि वर्टिकल ड्रिलिंग पर कुछ समय पहले से ही विचार किया जा रहा है।

जटिल प्रक्रिया

अंतरराष्ट्रीय सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स ने कुछ दिन पहले कहा था कि वर्टिकल ड्रिलिंग अधिक समय लेने वाला और जटिल विकल्प है, जिसके लिए सुरंग के ऊपरी हिस्से पर अपेक्षाकृत संकीर्ण जगह के कारण अधिक सटीकता और सावधानी बरतने की आवश्कयता होती है।

शिशुपाल कुमार
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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