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उत्तराखंड कैबिनेट ने UCC नियमावली को दे दी मंजूरी, सीएम धामी बोले- वादा पूरा किया

UCC in Uttarakhand: उत्तराखंड कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (UCC) नियमावली को मंजूरी दे दी है। इसी बीच सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि 'हमने जो वादा किया था, उसे पूरा किया है।' यूसीसी के लागू होने से उत्तराखंड में नागरिकों के लिए समान कानून लागू होगा।

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उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी।

Photo : Twitter

Uttarakhand Cabinet Approves UCC Rules: उत्तराखंड कैबिनेट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लिए नियमावली को मंजूरी दे दी। सीएम धामी ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि हमने जो वादा किया था उसे पूरा किया है। सीएम ने कहा कि जब हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2022 के विधानसभा चुनाव में जनता के बीच गए थे, तब हमने उनसे वादा किया था कि राज्य में सरकार बनने के बाद हमारा पहला कदम उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने का होगा।

मुख्यमंत्री धामी का दावा- हमने जो वादा किया, वो पूरा किया

सीएम पुष्कर धामी ने आगे कहा कि सरकार बनने के बाद हम यूसीसी विधेयक लाए। ड्राफ्ट कमेटी ने इसका प्रारूप तैयार किया। इसे विधानसभा में पास किया गया, फिर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून (एक्ट) बना। अब प्रशिक्षण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। आज कैबिनेट की बैठक में यूसीसी के नियमावली को मंजूरी दी गई है। हम प्रदेश में सभी जीचों की समीक्षा करने के बाद यूसीसी लागू करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य होगा।

उत्तराखंड में यूसीसी लागू हो जाने के बाद क्या कुछ बदल जाएगा?

यूसीसी के लागू होने से उत्तराखंड में नागरिकों के लिए समान कानून लागू होगा। यूसीसी कानून में सभी धर्म, जाति और वर्ग के लोगों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित किया गया है। सीएम धामी ने इस नियमावली को राज्य के विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

गौरतलब है कि पिछले साल 6 फरवरी को उत्तराखंड में यूसीसी बिल (विधेयक) पहली बार विशेष विधानसभा सत्र में पेश किया गया था। वहीं, 7 फरवरी को इसे विधानसभा में भारी बहुमत से पास कर दिया गया था। इसके बाद 13 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस बिल पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का दर्जा दिया था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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