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उत्तराखंड में हिमस्खलनः खिसक गया बर्फ का पहाड़, देखिए VIDEO

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  • Updated Oct 1, 2022, 09:20 AM IST

श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने समाचार एजेंसी एएनआई को सुबह बताया- आज सुबह हिमालयी क्षेत्र में एवलॉन्च (हिमस्खलन) हुआ है, पर केदारनाथ मंदिर को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। केदारनाथ मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में आता है। बाबा शिव का पवित्र धाम रुद्रप्रयाग (जिला मुख्यालय) से 86 किमी दूर है और यह देश के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है।

उत्तराखंड में शनिवार (एक अक्टूबर, 2022) की सुबह हिमस्खलन हो गया। बर्फ के पहाड़ का बड़ा सा हिस्सा केदारनाथ मंदिर के पास खिसक गया। घटना से जुड़े भयावह मंजर से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें काफी ऊंचाई से बर्फ का बड़ा हिस्सा दरकता दिखा।

इस बीच, श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने समाचार एजेंसी एएनआई को सुबह बताया- आज सुबह हिमालयी क्षेत्र में एवलॉन्च (हिमस्खलन) हुआ है, पर केदारनाथ मंदिर को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है।

वैसे, यह पहला मौका नहीं है, जब केदार घाटी में इस तरह का मंजर सामने आया हो। 21 सितंबर, 2022 को वहां हाईवे पर भूस्खलन हुआ था। अच्छी बात यह रही थी कि मलबे की चपेट में आसपास से गुजरने वाले वाहन नहीं आए थे। पर चारधामा यात्रा पर बारिश ने प्रभाव डाला था।

केदारनाथ मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में आता है। बाबा शिव का पवित्र धाम रुद्रप्रयाग (जिला मुख्यालय) से 86 किमी दूर है और यह देश के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है।

यह मंदिर चार-धाम यात्रा में शामिल है। पृथ्वी पर इसे शिव लोक कहा जाता है। मौसम संबंधी स्थितियों की वजह से सर्दियों में इस मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और भक्तों के लिए अक्षय तृतीया के बाद (अप्रैल-मई में) खुलता है।

हालांकि, विंटर ब्रेक (जितने समय बंद रहता है) के दौरान रुद्रप्रयाग के उक्तिमठ में बाबा केदार की पूजा-अर्चना की जाती है और छह महीने यह प्रक्रिया जारी रहती है, जिसके बाद बाबा अपने असल स्थान पर आते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं।

Abhishek Gupta
अभिषेक गुप्ताauthor

छोटे शहर से, पर सपने बड़े-बड़े. किस्सागो ऐसे जो कहने-बताने और सुनाने को बेताब. कंटेंट क्रिएशन के साथ नजर से खबर पकड़ने में पारंगत और "मीडिया की मंडी" में लगभग आठ साल का अनुभव. न्यूज, सिनेमा, बाइक्स और घूमने में दिलचस्पी.

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