UPI Payment Charges: यूपीआई पेमेंट पर MDR यानी Merchant Discount Rate को लेकर सरकार और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ गया है। सरकार का कहना है कि संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने MDR की व्यवस्था की सिफारिश की थी और उस समय कांग्रेस सांसदों ने इसका विरोध दर्ज नहीं कराया था। वहीं, कांग्रेस सांसदों का कहना है कि सरकार ने जिस खास MDR व्यवस्था की घोषणा की है, उस पर समिति में चर्चा ही नहीं हुई थी।
सरकार ने समिति की रिपोर्ट का दिया हवाला
सरकारी सूत्रों ने संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 44वीं एक्शन टेकन रिपोर्ट का हवाला दिया है। इस रिपोर्ट में अलग-अलग तरह के UPI लेनदेन के लिए टियर आधारित MDR व्यवस्था जल्द लागू करने की सिफारिश की गई थी।
सरकार का कहना है कि जब यह रिपोर्ट अपनाई गई, तब कांग्रेस के पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ समिति के सदस्य थे। सरकार के मुताबिक, रिपोर्ट में इन सांसदों की ओर से कोई औपचारिक असहमति दर्ज नहीं की गई। इसी आधार पर सरकार कांग्रेस और राहुल गांधी के MDR के विरोध पर सवाल उठा रही है।
विपक्ष का दावा- बैठक में MDR पर सवाल उठे
वहीं, विपक्षी सांसद सरकार के इस दावे को सही नहीं मानते। एक विपक्षी सांसद ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि समिति की बैठक में MDR को लेकर कई सदस्यों ने सवाल उठाए थे। बकौल सांसद, इनमें विपक्ष के साथ-साथ बीजेपी के सांसद भी शामिल थे।
सांसद का दावा है कि सदस्यों ने MDR से जुड़ी सिफारिश में बदलाव करने की बात भी कही थी। उनका आरोप है कि समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने रिपोर्ट को समय पर जमा करने की जरूरत बताई। सांसद के मुताबिक, रिपोर्ट तैयार करने और उसे प्रिंट कराने के लिए समय कम था और सदस्यों के सुझावों को शामिल किए बिना रिपोर्ट जमा कर दी गई।
'जिस MDR की घोषणा हुई, उस पर चर्चा नहीं हुई'
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में पार्टी के उपनेता गौरव गोगोई ने सरकार के दावे पर सवाल उठाया है। गोगोई का कहना है कि सरकार ने बाद में जिस खास UPI MDR व्यवस्था की घोषणा की, वह प्रस्ताव समिति के सामने रखा ही नहीं गया था।
उनके मुताबिक, समिति की बैठक में MDR की जरूरत को लेकर सवाल जरूर पूछे गए थे, लेकिन सरकारी अधिकारियों की ओर से इन सवालों के स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दिए गए।
मनीष तिवारी ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी गोगोई की बात का समर्थन किया है। तिवारी के मुताबिक, 15 अक्टूबर से लागू होने वाले MDR की दर, शुल्क, अधिकतम सीमा और किन लेनदेन को छूट मिलेगी, इस बारे में कोई खास प्रस्ताव समिति के सामने नहीं रखा गया था। उन्होंने कहा कि समिति की बैठकों में MDR की जरूरत और इसके असर को लेकर भी सदस्यों ने सवाल उठाए थे।
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क्या है पूरा विवाद?
सरकार का कहना है कि संसद की समिति ने टियर आधारित MDR व्यवस्था की सिफारिश की थी और कांग्रेस सांसदों ने इसका कोई औपचारिक विरोध दर्ज नहीं कराया।
वहीं कांग्रेस सांसदों का कहना है कि समिति की सिफारिश और बाद में सरकार द्वारा घोषित विशिष्ट MDR व्यवस्था, दोनों को एक नहीं माना जा सकता। उनका दावा है कि मौजूदा MDR प्रस्ताव समिति के सामने चर्चा के लिए आया ही नहीं था।
इस तरह UPI MDR को लेकर विवाद अब इस सवाल पर भी पहुंच गया है कि संसदीय समिति में वास्तव में क्या चर्चा हुई और रिपोर्ट में दर्ज सिफारिश का क्या मतलब था।
