शहर-शहर करोड़पति निकल रहे मजदूर और भिखारी, यूपी और मध्य प्रदेश के इन मामलों से हड़कंप, जानें- क्या है सच?
- Edited by: Nitin Arora
- Updated Jan 19, 2026, 03:30 PM IST
Beggar Become Lakhpati in Indoor: उत्तर प्रदेश के हरदोई में गरीबी की रेखा के नीचे जिंदगी काट रहा एक मजदूर जब कागजों में अचानक 'करोड़पति' बना दिया जाए, तो यह सिर्फ हैरानी नहीं, बल्कि सिस्टम पर बड़ा सवाल है। उधर इंदौर में प्रशासन ने भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के दौरान कुष्ठ रोग से जूझ रहे 50 वर्षीय भिखारी को बचाया है और शुरुआती तौर पर पता चला है कि वह तीन मकानों, एक कार और तीन ऑटो रिक्शा समेत लाखों रुपये की संपत्ति का मालिक है।
शहर-शहर करोड़पति निकल रहे मजदूर और भिखारी, क्या है सच? (प्रतीकात्मक फोटो)
Hardoi, Indore News: देश में आज दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जो जैसे दिखते हैं, वैसे है नहीं उनमें कुछ ट्विस्ट है। पहले बात यूपी के केस की कर लेते हैं। उत्तर प्रदेश के हरदोई में गरीबी की रेखा के नीचे जिंदगी काट रहा एक मजदूर जब कागजों में अचानक 'करोड़पति' बना दिया जाए, तो यह सिर्फ हैरानी नहीं, बल्कि सिस्टम पर बड़ा सवाल है। हरदोई जिले के माधौगंज थाना क्षेत्र के रुदामऊ गांव से सामने आया मामला कुछ ऐसा ही है। दरअसल रुदामऊ गांव निवासी गोविंद कुमार दिहाड़ी मजदूर है। रोज मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पेट पालने वाला गोविंद उस वक्त बदहवास हो गया, जब उसके नाम आयकर विभाग का नोटिस पहुंचा। नोटिस में उस पर 7 करोड़ 15 लाख 92 हजार 786 रुपये के लेन-देन और संपत्ति का हिसाब मांगा गया है। कागजों में गोविंद करोड़ों की संपत्ति का मालिक बताया गया है, जबकि हकीकत यह है कि उसके पास रहने के लिए एक छोटी सी झोपड़ी और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने तक के पैसे नहीं हैं। नोटिस के बाद परिवार सदमे में है, कई दिनों से घर में चूल्हा तक नहीं जला।
गोविंद काम की तलाश में गया था कानपुर
परिजनों के अनुसार, करीब छह साल पहले गोविंद काम की तलाश में कानपुर गया था। वहीं, एक महिला ने उसे सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का लालच दिया। इसी बहाने उसे सीतापुर के बिसवां ले जाया गया, जहां बैंक में उसका खाता खुलवाया गया। बदले में उसे केवल दो-तीन हजार रुपये दिए गए और उसकी पासबुक व चेकबुक अपने पास रख ली गई। आशंका है कि जालसाजों ने इसी खाते का इस्तेमाल कर गोविंद के नाम पर फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये का लेन-देन किया और गरीब मजदूर को मोहरा बना दिया।
जांच एजेंसी पीछे लगी
मंगलवार को आयकर विभाग की टीम गांव पहुंची और पुराने नोटिस व बैंक ट्रांजेक्शन की जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, पहले भी नोटिस भेजे गए थे, लेकिन जानकारी और समझ के अभाव में गोविंद जवाब नहीं दे सका। अब विभाग ने 20 जनवरी 2026 तक जवाब देने का अंतिम मौका दिया है।
गोविंद का बड़ा भाई ठेली लगाता है और छोटा भाई मजदूरी करता है। पूरा परिवार बेहद गरीब है। पीड़ित ने प्रशासन और सरकार से निष्पक्ष जांच कर असली दोषियों पर कार्रवाई और उसे न्याय दिलाने की मांग की है। यह मामला उन गरीबों के लिए चेतावनी भी है, जो थोड़े से लालच में अपने दस्तावेज दूसरों को सौंप देते हैं। अब सवाल यह है कि क्या गोविंद को इंसाफ मिलेगा या वह सिस्टम की खामी का शिकार बनकर रह जाएगा।
इंदौर में भिखारी निकला ‘लाखों रुपये की संपत्ति का मालिक', दंग रह गए अधिकारी
इंदौर में प्रशासन ने भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के दौरान कुष्ठ रोग से जूझ रहे 50 वर्षीय भिखारी को बचाया है और शुरुआती तौर पर पता चला है कि वह तीन मकानों, एक कार और तीन ऑटो रिक्शा समेत लाखों रुपये की संपत्ति का मालिक है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। प्रशासन ने इंदौर में भीख लेने के साथ ही भीख देने और भिखारियों से कोई सामान खरीदने तक पर कानूनी रोक लगा रखी है और उसका दावा है कि शहर ‘भिक्षुकमुक्त’ है। महिला और बाल विकास विभाग के अधिकारी दिनेश मिश्रा ने बताया कि आम लोगों की सूचना पर सर्राफा क्षेत्र से एक कुष्ठ रोगी को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराने के लिए बचाया गया है।
मिश्रा, भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के नोडल अधिकारी हैं। उन्होंने बताया, 'हमें पता चला है कि इस व्यक्ति के पास तीन पक्के मकान हैं। इनमें तीन मंजिलों वाला एक भवन शामिल है। इसके अलावा, उसके पास तीन ऑटो रिक्शा हैं जिन्हें उसने किराये पर दे रखा है।' मिश्रा के मुताबिक, इस व्यक्ति के पास एक कार भी है जिसमें बैठकर वह भीख मांगने जाता है और इसके लिए उसने चालक रखा हुआ है। उन्होंने बताया, 'कुष्ठ रोग से जूझ रहा यह व्यक्ति पहियों के सहारे घिसटने वाली गाड़ी पर बैठकर भीख मांगता है।'
मिश्रा के मुताबिक, यह व्यक्ति वर्ष 2021-22 से भिक्षावृत्ति कर रहा है और यह भी पता चला है कि उसने सर्राफा क्षेत्र में लोगों को चार से पांच लाख रुपये उधार दिए हैं जिनसे वह दैनिक ब्याज वसूलता है। उन्होंने बताया, 'इस ब्याज से वह हर दिन 1,000 से 2,000 रुपये कमाता है। इसके अलावा, उसे रोजाना 400 रुपये से 500 रुपये भीख के तौर पर मिल जाते हैं।' मिश्रा के मुताबिक, इस व्यक्ति को एक आश्रय गृह में रखा गया है।
इंदौर 'भिक्षुकमुक्त शहर'
जिलाधिकारी शिवम वर्मा ने कहा कि इंदौर 'भिक्षुकमुक्त शहर' है और भिक्षावृत्ति की सूचना मिलने पर अभियान चलाकर भिखारियों का पुनर्वास किया जाता है। उन्होंने कहा कि सर्राफा क्षेत्र में भिक्षावृत्ति से बचाए गए व्यक्ति की संपत्तियों के बारे में प्रशासन को शुरुआती जानकारी मिली है और तथ्यों की जांच के बाद उचित कानूनी प्रावधानों के अनुसार कदम उठाए जाएंगे।
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