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उन्नाव रेप केस: कुलदीप सिंह सेंगर ने जमानत के लिए खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा; हाई कोर्ट के आदेश को दी चुनौती

Kuldeep Singh Sengar: उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की मौत पुलिस हिरासत में हुई थी, इसी मामले में कुलदीप सिंह सेंगर और उनके भाई समेत पांच अन्य लोगों को 10 साल की सजा सुनाई गई है।

कुलदीप सिंह सेंगर।

कुलदीप सिंह सेंगर।

उन्नाव दुष्कर्म मामले में आरोपी और सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने दुष्कर्म मामले में रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में उन्होंमे जमानत की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट भी उनकी याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई है। शीर्ष अदालत नौ फरवरी यानी सोमवार को उनकी याचिका पर सुनवाई करेगी।

गौरतलब है कि पीड़िता के पिता की मौत से संबंधित मामले में निचली अदालत ने कुलदीप सेंगर को दस साल की कैद की सजा सुनाई है। इस मामले में उन्होंने पहले दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था, जहां से उन्हें झटका मिला। बीती 18 जनवरी को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सेंगर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अब सेंगर ने जमानत याचिका खारिज करने के उच्च न्यायालय के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। वहीं, बलात्कार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय द्वारा सेंगर को दी गई जमानत पर रोक लगा दी थी।

2020 में कोर्ट ने सुनाई थी सजा

पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में अधीनस्थ अदालत ने 13 मार्च 2020 को सेंगर को 10 साल के कठोर कारावास की सजा के साथ 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। अधीनस्थ अदालत ने कहा था कि परिवार के “एकमात्र कमाने वाले सदस्य” की हत्या के मामले में कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।

कुलदीप सेंगर का भाई भी दोषी

अदालत ने दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर और पांच अन्य लोगों को भी 10 साल की जेल की सजा सुनाई थी। सेंगर के इशारे पर शस्त्र अधिनियम के तहत पीड़िता के पिता को गिरफ्तार किया गया था और पुलिस हिरासत में बर्बरता के कारण नौ अप्रैल 2018 को उनकी मृत्यु हो गई थी। अधीनस्थ अदालत ने यह मानते हुए कि हत्या का इरादा नहीं था, सेंगर को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत हत्या का दोषी नहीं ठहराया, लेकिन आईपीसी की धारा 304 के तहत दोषियों को गैर-इरादतन हत्या के लिए अधिकतम सजा सुनाई।

2017 में कुलदीप सेंगर ने किया था बलात्कार

सेंगर ने 2017 में नाबालिग का अपहरण कर उससे दुष्कर्म किया था। दुष्कर्म के मुख्य मामले में दिसंबर 2019 को सेंगर को दोषी ठहराने और आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के फैसले के खिलाफ, साथ ही पीड़िता के पिता की मौत के मामले में सेंगर की अपील उच्च न्यायालय में लंबित हैं। उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर 2025 को दुष्कर्म मामले में सेंगर की सजा को, दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया था। इसके बाद, शीर्ष अदालत ने 29 दिसंबर 2025 को इस निलंबन पर रोक लगा दी थी।

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शिव शुक्ला
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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