Trump Meets Shehbaz Sharif-Asim Munir: बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान फिर भी कम निकले... यह कहावत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर बिल्कुल फिट बैठ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के लिए बेताब शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की न सिर्फ व्हाइट हाउस में फजीहत हुई बल्कि अमेरिकी ने पाकिस्तान को उसकी हैसियत भी दिखा दी।
शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को ट्रंप से मुलाकात करने के लिए आधे घंटे का इंतजार करना पड़ा। दोनों एक अलग कमरे में बैठकर ट्रंप का इंतजार कर रहे थे। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति टिकटॉक को लेकर कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए मीडियाकर्मियों से मुलाकात कर रहे थे। लंबे इंतजार के बाद शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को ट्रंप से बातचीत का मौका मिला। व्हाइट हाउस प्रेस पूल की कुछ तस्वीरों में मुनीर और शरीफ को व्हाइट हाउस परिसर में इंतजार करते हुए देखा गया।

ट्रंप से मिले शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर।(फोटो सोर्स: AP)
अमेरिका ने मुलाकात की तस्वीरें नहीं की साझा
आमतौर पर व्हाइट हाउस विदेशी नेताओं के साथ राष्ट्रपति की मुलाकात को मीडिया से शेयर करता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। बैठक की जानकारी सिर्फ पाकिस्तान के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स तक सीमित रही।
लंदन स्थित भू-राजनीतिक विश्लेषक ओमर वजीरी ने ट्रंप-शहबाज-मुनीर की मुलाकात पर टिप्पणी की है। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस दिखी, न वॉइट हाउस में नेताओं के चलते हुए नाटकीय दृश्य, यहां तक कि सामान्य कूटनीतिक धूमधाम भी नहीं। बस कुछ तस्वीरें थीं, जो पाकिस्तानी पक्ष ने बेमन से जारी कीं। (बातचीत के) ब्योरे पर पूरी तरह से चुप्पी।'
इससे पहले 23 सितंबर को शरीफ ने ट्रंप के साथ एक अनौपचारिक मुलाकात भी की थी। ये मुलाकात आठ इस्लामिक-अरब देशों के नेताओं के साथ ट्रंप की बैठक के बाद हुई। इस दौरान पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार भी मौजूद थे।

व्हाइट हाउस परिसर में ट्रंप से मिले शहबाज शरीफ।(फोटो सोर्स: AP)
पाकिस्तान पर क्यों मेहरबान है अमेरिका?
सवाल ये है कि आखिर अमेरिका को पाकिस्तान की जरूरत क्यों है? इसका जवाब है कि अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों की बुनियाद ‘आपसी हितों’ पर टिकी है, न कि ‘साझा मूल्यों’ पर। इस रिश्ते के पीछा ईरान भी एक बड़ी वजह है। पाकिस्तान, ईरान का पड़ोसी मुल्क है। हाल ही में इजरायल और ईरान तनाव बढ़ते जा रहे हैं। ईरान के खिलाफ अब अमेरिका सीधा मैदान में कूदना चाहता है। ऐसे में पाकिस्तान को अमेरिका, रणनीतिक तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है।
