देहरादून के सेलाकुई इलाके में नस्लीय टिप्पणी का विरोध करना एक छात्र को भारी पड़ गया। करीब दो हफ्ते तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद त्रिपुरा के छात्र अंजेल चकमा ने दम तोड़ दिया। अंजेल जिज्ञासा यूनिवर्सिटी में MBA फाइनल ईयर का छात्र था।
क्या है मामला?
यह घटना 9 दिसंबर की बताई जा रही है। अंजेल अपने भाई के साथ रोजमर्रा की तरह सेलाकुई बाजार गया था। आरोप है कि वहां कुछ युवकों ने उनके चेहरे और भाषा को लेकर आपत्तिजनक नस्लीय टिप्पणियां कीं। जब अंजेल और उसके भाई ने इसका विरोध किया, तो विवाद बढ़ गया।
बेरहमी से की गई मारपीट
प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के मुताबिक, आरोपियों ने दोनों भाइयों पर हमला कर दिया। अंजेल को इस कदर पीटा गया कि वह मौके पर ही गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया गया,जहां उसकी हालत नाजुक बनी रही।
15 दिन तक चला इलाज
अस्पताल में अंजेल का करीब 15 दिनों तक इलाज चला। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन गंभीर चोटों के चलते मंगलवार सुबह उसने दम तोड़ दिया।
हिरासत में 5 आरोपी
पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक पांच आरोपियों को हिरासत में लिया है, जिनमें दो नाबालिग बताए जा रहे हैं। शुरुआत में मामला मारपीट का दर्ज किया गया था, लेकिन छात्र की मौत के बाद इसमें हत्या की धाराएं जोड़ दी गई हैं। पुलिस के अनुसार, इस घटना में शामिल एक आरोपी फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
छात्र की मौत से आक्रोश
अंजेल चकमा की मौत के बाद छात्र समुदाय और पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़े संगठनों में गहरा आक्रोश है। लोग नस्लीय टिप्पणियों और हिंसा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
उत्तरी पूर्वी छात्र संघ ने निकाला कैंडल मार्च
इस घटना के विरोध में उत्तर पूर्वी छात्रों ने एकजुट होकर कैंडल मार्च निकाला। यूनिफाइड त्रिपुरा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, देहरादून (UTSAD) ने सभी उत्तर पूर्वी संघों और यूनियनों के सहयोग से आज (27 दिसंबर 2025) को एंजेल चकमा की याद में कैंडल मार्च का आयोजन किया, जिसमें न्याय की मांग की गई। मार्च शाम 5 बजे से 7 माइल्स फार्म, सुधोवाला में शुरू हुआ, और छात्रों, समुदाय के सदस्यों व समर्थकों से बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की गई।
