पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार और सांसदों-विधायकों की चौतरफा बगावत झेल रही ममता बनर्जी की पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) को अब देश की राजधानी दिल्ली में सबसे बड़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। पार्टी के भीतर मचे भारी आंतरिक घमासान के बीच TMC को नई दिल्ली स्थित अपना मुख्य राष्ट्रीय पार्टी दफ्तर खाली करना पड़ गया है। यह दफ्तर बैरकपुर से TMC के बागी सांसद पार्थ भौमिक के सरकारी बंगले से चल रहा था। बागी खेमे में शामिल होने के बाद पार्थ भौमिक द्वारा बंगला छोड़कर फ्लैट की मांग करने के कारण TMC को अपना यह ठिकाना गंवाना पड़ा है।
'साउथ एवेन्यू' शिफ्ट हुआ ठिकाना
लंबे समय से नई दिल्ली का '20, डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड' स्थित आलीशान बंगला राष्ट्रीय राजधानी में तृणमूल कांग्रेस की तमाम राजनीतिक गतिविधियों, रणनीतिक बैठकों और हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य केंद्र हुआ करता था। लेकिन बुधवार को इस परिसर में एक बेहद चौंकाने वाला नजारा देखने को मिला। पार्टी के कर्मचारियों ने इस बंगले से TMC का मुख्य साइनबोर्ड नीचे उतार दिया। इसके साथ ही बंगले के भीतर और बाहर लगीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की सभी तस्वीरें, होर्डिंग्स और पोस्टरों को भी वहां से पूरी तरह हटा दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, दफ्तर के इन सभी सामानों और दस्तावेजों को फिलहाल TMC के राज्यसभा सांसद नदीमुल हक के 'साउथ एवेन्यू' स्थित सरकारी आवास पर अस्थायी रूप से शिफ्ट किया गया है। फिलहाल यही पता दिल्ली में TMC की गतिविधियों का नया केंद्र बनेगा।
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लोकसभा सचिवालय ने जारी किया आदेश
दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम बैरकपुर के सांसद पार्थ भौमिक के बगावती रुख का सीधा नतीजा है। ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट में शामिल होने के बाद पार्थ भौमिक ने TMC को झटका देने के लिए खुद लोकसभा सचिवालय से अपना सरकारी आवास बदलने का एक लिखित और आधिकारिक अनुरोध किया था, जिसे सचिवालय ने तत्काल स्वीकार कर लिया। लोकसभा सचिवालय की MS शाखा द्वारा 9 जून 2026 को जारी किए गए आधिकारिक आवंटन आदेश के अनुसा। सांसद पार्थ भौमिक को अब उनके पुराने बंगले (20, डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड - टाइप VI आवास) के स्थान पर नई दिल्ली में रहने के लिए फ्लैट नंबर 501, हुगली (टाइप VII आवास) आवंटित कर दिया गया है। इस आदेश के लागू होते ही पुराने बंगले पर TMC का अधिकार पूरी तरह समाप्त हो गया और पार्टी के पास इस संपत्ति को तुरंत खाली करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा।
दिल्ली में पहचान का संकट
राजनीतिक गलियारों में इस घटना को ममता बनर्जी के लिए एक बड़े व्यक्तिगत और राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। जहां एक ओर पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के 58 से अधिक विधायक बागी होकर मुख्य विपक्षी समूह बन चुके हैं और लोकसभा में 19 सांसदों ने अलग गुट बनाने के लिए अध्यक्ष को पत्र लिखा है, वहीं अब दिल्ली में पार्टी का मुख्य ऑपरेशनल बेस छिन जाने से राष्ट्रीय स्तर पर TMC के अस्तित्व और साख पर गहरा संकट खड़ा हो गया है। दिल्ली में अब पार्टी के पास कोई आधिकारिक स्वतंत्र ठिकाना नहीं बचा है।
