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'गमले में उगाएं या फिर न खाएं', CM योगी की मंत्री ने दे डाली टमाटर की महंगाई कम करने की अनोखी सलाह

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 24, 2023, 08:26 AM IST

Pratibha Shukla Minister: टमाटर पर बढ़ रही महंगाई के बारे में जब हरदोई पहुंची महिला कल्याण एवं बाल विकास राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि टमाटर महंगा है तो उसे गमले में उगाएं या फिर ऐसी महंगी चीजें न खाएं।

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प्रतिभा शुक्ला मंत्री

Photo : Twitter

Pratibha Shukla Minister: टमाटर के दाम दिन दिनों आसमान छू रहे हैं। सरकार के प्रयासों के बाद इसके दाम में कुछ कमी आई थी, लेकिन फुटकर में दाम एक बार फिर से चढ़ने लगे हैं और इन दिनों बाजार में टमाटर 200 रुपये किलो के आसपास बिक रहा है। इस बीच योगी सरकार में मंत्री प्रतिभाग शुक्ला ने महंगाई कम करने का आनोखा तरीका बताया है। उन्होंने टमाटर न खाने की सलाह दी है, जिसके बाद उनकी काफी आलोचना भी रहो रही है।

दरअसल, टमाटर पर बढ़ रही महंगाई के बारे में जब हरदोई पहुंची महिला कल्याण एवं बाल विकास राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि टमाटर महंगा है तो उसे गमले में उगाएं। या फिर ऐसी महंगी चीजें न खाएं।

कीमतें हो जाएंगी अपनेआप कम

दरअसल, प्रतिभा शुक्ला हरदोई में पौधरोपण के कार्यक्रम में पहुची थीं। इस दौरान जब वह मीडिया के सवालों के जवाब दे रही थीं, तो टमाटर पर महंगाई को लेकर उनका बयान वायरल हो गया। प्रतिभा शुक्ला ने कहा, मैं बचपन से देख रही हूं कि इस मौसम में टमाटर महंगा हो जाता है। उन्होंने कहा, मेरे क्षेत्र में महिलाएं पोषण वाटिका बनाकर उसमें सब्जी उगा लेती हैं। अब तो तीन-चार गमले में ही काफी टमाटर उगाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, टमाटर महंगा है तो नीबू का उपयोग कर लें या फिर टमाटर खाना ही छोड़ दें। इससे टमाटर खुद-ब-खुद सस्ते हो जाएंगे।

फिर 150 रुपये के पार हुआ टमाटर

बीते दिनों टमाटर के दाम 200 रुपये किलो के भी ऊपर पहुंच गए थे, जिसके बाद केंद्र सरकार ने सस्ते दरों पर लोगों को टमाटर उपलब्ध कराने के लिए जगह-जगह स्टाल खोले। पहले यहां 90 रुपये में टमाटर दिया गया, जिसके बाद इसके दाम 80 और फिर 70 रुपये किलो तक पहुंच गए। इसका असर बाजार में भी हुआ और दाम नीचे आए। हालांकि, एक बार फिर से टमाटर के दाम बढ़ना शुरू हो गए हैं। फुटकर बाजार में इसके दाम 150 रुपये किलो के पार पहुंच गए हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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