देश

संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी में तृणमूल; SIR और इससे संबंधित मौतों का उठाएगी मुद्दा

Winter Session: तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी अगले महीने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया और उससे कथित तौर पर जुड़ी मौतों का मुद्दा उठाएगी। तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि वह एसआईआर के लिए राज्यों के चयन पर केंद्र और निर्वाचन आयोग से स्पष्टीकरण मांगेगी।

Mamata Banerjee

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी (फाइल फोटो)

Winter Session: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी अगले महीने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और उससे कथित तौर पर जुड़ी मौतों का मुद्दा उठाएगी। राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी निर्वाचन आयोग पर कम अवधि और ‘अव्यवहारिक समय-सीमा’ तय करके जमीनी स्तर के कर्मचारियों पर ‘एसआईआर से जुड़ा अमानवीय दबाव’ डालने का आरोप लगा रही है।

केंद्र से तीखे सवाल पूछने की तैयारी में तृणमूल

पार्टी ने दावा किया कि मतदाता सूची में त्वरित संशोधन से बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) और नागरिकों में भय, थकान और मौत की घटनाएं हुईं।

पार्टी नेता ने कहा कि पार्टी सवाल उठाएगी कि पश्चिम बंगाल में सबसे गहन जांच क्यों की गई, जबकि समान जनसांख्यिकीय प्रोफाइल वाले कई सीमावर्ती राज्यों को एसआईआर से छूट दी गई है। तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि वह एसआईआर के लिए राज्यों के चयन पर केंद्र और निर्वाचन आयोग से स्पष्टीकरण मांगेगी।

यह भी पढ़ें: 'SIR एक निर्धारित और पारदर्शी प्रक्रिया...', TMC के आरोपों को चुनाव आयोग ने सिरे से किया खारिज

कब से शुरू हो रहा शीतकालीन सत्र?

पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा, ‘‘बांग्लादेश और म्यांमा जैसे देशों के साथ सीमा साझा करने वाले त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मणिपुर को पूरी तरह से छूट क्यों दी गई है? असम में विशेष संशोधन की प्रक्रिया कमजोर क्यों है? क्या असली इरादा बंगाली पहचान को चुनौती देना और बंगाली मतदाताओं को मतदाता सूची से व्यवस्थित रूप से हटाना है?’’ संसद का शीतकालीन सत्र एक से 19 दिसंबर के बीच चलेगा।

वरिष्ठ टीएमसी नेताओं ने कहा कि नवंबर की शुरुआत में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू किया गया मतदाता सूची संशोधन पश्चिम बंगाल में ‘असाधारण जल्दबाजी’ के साथ किया गया है, जिससे नागरिकों में दहशत फैल गई और बूथ स्तर के अधिकारियों (BJP) पर ‘अभूतपूर्व बोझ’ पड़ा गया जिनमें से कई कथित तौर पर शिक्षण कर्तव्यों और देर रात तक चलने वाले गणना कार्य से जूझते हुए मर गए हैं।’’ पार्टी ने दावा किया कि इस प्रक्रिया की शुरुआत से अब तक चार बीएलओ सहित 41 लोगों की मौत हो चुकी है।

कुछ मृतकों के परिवारों ने मौत का कारण समय सीमा की कमी, अपर्याप्त प्रशिक्षण और भारी भरकम प्रक्रिया से उपजे तनाव को बताया है। एक टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया, ‘‘जिस काम में आमतौर पर दो से तीन साल लगने चाहिए, उसे केंद्र में बैठे राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए दो महीनों में समेट दिया गया है।’’

यह भी पढ़ें: 'खून से सने हैं मुख्य चुनाव आयुक्त के हाथ', ममता दीदी की पार्टी बोली- बंगाल में SIR के चलते 40 लोगों की हुई मौत

बंगाल में कहां तक पहुंची SIR प्रक्रिया

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया लगभग पूरा होने वाली है जहां 7.64 करोड़ प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं, 82 प्रतिशत डिजिटल हो चुके हैं और घर-घर जाकर सत्यापन अभियान के तहत 99.8 प्रतिशत मतदाता शामिल किये जा चुके हैं। अंतिम मतदाता सूची सात फरवरी, 2026 को प्रकाशित होने की उम्मीद है। टीएमसी ने पूरे शीतकालीन सत्र के दौरान दोनों सदनों में हस्तक्षेप करने और निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर जवाबदेही के लिए दबाव बनाने की योजना बनाई है।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।

लेटेस्ट न्यूज

अनुराग गुप्ता
अनुराग गुप्ता Author

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स ... और देखें

End of Article