पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद टाइम्स नाउ नवभारत की रिपोर्ट भावना किशोर जेल से रिहा हो गई हैं। उनकी रेग्युलर बेल पर सोमवार को सुनवाई होगी।
अभी जंग बाकी...
भावना किशोर की रिहाई के बाद एडिटर इन चीफ टाइम्स नाउ नवभारत नाविका कुमार ने कहा कि अभी जंग बाकी है। उन्होंने कहा कि भावना के साथ गिरफ्तार किए गए कैमरामैन मृत्युजंय कुमार और ड्राइवर परमिंदर अभी भी जेल में हैं। कल उनकी भी बेल पर सुनवाई है। आधी जंग हमारी पूरी हुई है। मृत्युजंय और परमिंदर के लिए हमें जंग लड़नी है।
क्या है पूरा मामला
भावना किशोर को पांच मई को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तब भावना अरविंद केजरीवाल के एक कार्यक्रम को कवर करने के लिए लुधियाना गईं थींं। पहले तो वहां उन्हें कार्यक्रम कवर करने नहीं दिया गया, इसके बाद जब अपनी टीम के साथ वो वापस लौटने लगीं तो उन्हें पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पंजाब पुलिस ने दावा किया कि उनकी गाड़ी ने एक ई-रिक्शा को टक्कर मार दी थी, जिसके बाद उसमें सवार महिला से बहस हुई और भावना किशोर ने एससी-एसटी एक्ट के तहत आने वाले दुर्व्यहार किए।
कई नियमों का उल्लघंन
जब पुलिस आती है तो वो कई नियमों का उल्लंघन करती है। पुलिस एक महिला रिपोर्टर को, बिना महिला पुलिसकर्मियों की उपस्थिति के अवैध रूप से हिरासत में लेती है। जो पुलिसकर्मी भावना को हिरासत में लेता है, उसकी वर्दी पर नेमप्लेट तक नहीं होता है। जो ड्यूटी पर जरूरी चीजों में बेहद अहम है। हिरासत के तुरंत बाद परिवार के सदस्यों को सूचित करना होता है, लेकिन इसका भी उल्लघंन होता है। भावना के परिवार को रात 10:41 बजे सूचित किया जाता है। सूर्यास्त के बाद किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद भावना को न केवल रात 8:55 बजे गिरफ्तार किया गया था, बल्कि उसे रात भर और शनिवार को दोपहर तक पुलिस स्टेशन में भी रखा जाता है।
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