Times Now Amazing Indiana Awards 2023: कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए इस बार का टाइम्स नाउ अमेजिग इंडियंस अवार्ड 2023 इंडिया स्किलपीडिया फाउंडेशन (सोसायटी) के अध्यक्ष डॉ जयकुमार को दिया गया है। उन्होंने अपने दूरदर्शी कदमों से पूर्वोत्तर भारत में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। उसका असर यह हुआ है कि बड़ी संख्या युवा कृषि उद्यमी बन रहे हैं। और राज्य की इकोनॉमी में न केवल इजाफा कर रहे हैं बल्कि रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहे हैं।
कौन हैं डॉ जयकुमार करुप्पुसामी
डॉ. जयकुमार करुप्पुसामी पिछले 33 वर्षों से इंडिया स्किलपीडिया फाउंडेशन (सोसायटी) के अध्यक्ष हैं।डॉ जयकुमार की अगुआई में पूर्वोत्तर राज्यों के युवाओं को वहां की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ऐसे कृषि उपकरण असेंबल करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो विशेष रूप से पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों के लिए डिजाइन की गई हैं। इसके लिए युवाओं को वाहन प्रौद्योगिकी, मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस, फैब्रिकेशन, हाइड्रोलिक सिस्टम और ऑटोमेशन का बुनियादी प्रशिक्षण देने और खुद बिजनेस करने के लक्ष्य से तैयार होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसके लिए युवाओं को सृष्टिनगर गुवाहाटी टेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर में छह महीने का गहन आवासीय प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
कौशल प्राप्त युवा अब मशीनों के उत्पादन में सक्रिय रूप से शामिल हैं। जहां इन मशीनों का जोरहाट के नॉर्थ ईस्ट इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी सीएसआईआर लैब में परीक्षण किया जाएगा। इस दिशा में की गई कोशिशों का ही परिणाम है कि मई 2023 में यूएस पेटेंट (यूएस 11,653,584बी2) प्राप्त हुआ, साथ ही कनाडा और यूरोप से भी पेटेंट लेने की प्रक्रिया जारी है। इस पहल को पूर्वोत्तर परिषद और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय से भी समर्थन मिला है।
क्या हुआ फायदा
छोटे खेतों, पहाड़ी इलाकों, घर के पीछे के इलाकों में बागवानी के लिए उपयुक्त बहुउद्देश्यीय इलेक्ट्रिक और आईसी इंजन वेरिएंट कृषि मशीनें जुताई, कटाई, मिट्टी को तैयार करने, बीज बोने, खाद बनाने और गड्ढे खोदने का काम करती हैं। लाभार्थियों में पूर्वोत्तर राज्यों के युवा, श्रमिक, लॉजिस्टिक सेवा प्रदाता, विक्रेता, बिक्री एजेंसियां, डेवलपमेंट एजेंसियां, आदि शामिल हैं।
इसी प्रयास में आठ ग्राम समुदायों में से प्रत्येक में कॉमन औद्योगिक मैन्युफैक्चरिंग वर्कशॉप और इन्क्यूबेशन मॉडल को भी विकसित किया गया है। जहां कम से कम 6 महीने के गहन औद्योगिक प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं के जरिए मार्गदर्शन, हैंडहोल्डिंग का सहयोग दिया जा रहा है। जिससे कि ग्राम समुदाय के लोग पहले से काम कर रहे कारोबारियों के साथ जुड़ सकें।
