देश

चुनाव में हार ने राहुल गांधी पर मानसिक रूप से डाला असर; जानिए कांग्रेस नेता पर किसने कर दी ये टिप्पणी

देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि चुनाव में हार ने राहुल पर मानसिक रूप से असर डाला है। उन्होंने आगे कहा कि मैं गांधी को सलाह दूंगा कि वह विदेश यात्रा करने और देश को बदनाम करने के बजाय लोगों के बीच जाकर काम करें।

Image

देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी को दी ये सलाह।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने निर्वाचन आयोग पर टिप्पणी करने को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना करते हुए सोमवार को कहा कि लगातार चुनावी में हार ने गांधी पर मानसिक रूप से असर डाला है। अमेरिका की यात्रा पर गए गांधी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत गठबंधन की जीत पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की (सरकार के साथ) 'मिलीभगत' है।

राहुल गांधी को महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस ने दी ये सलाह

इस तरह की टिप्पणियों को ‘बचकाना’ बताते हुए फडणवीस ने कहा, 'मैं गांधी को सलाह दूंगा कि वह विदेश यात्रा करने और देश को बदनाम करने के बजाय लोगों के बीच जाकर काम करें। इससे (इस तरह के बयानों से) उन्हें वोट नहीं मिलेंगे। चुनावों में लगातार हार ने गांधी को मानसिक रूप से परेशान कर दिया है।' गांधी ने रविवार को अमेरिका में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दावा किया कि सरल शब्दों में कहें तो महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में राज्य में वयस्कों की संख्या से ज्यादा लोगों ने मतदान किया।

राहुल गांधी ने ऐसा क्या कहा कि छिड़ गया सियासी विवाद?

राहुल गांधी ने कहा, 'निर्वाचन आयोग ने हमें शाम साढ़े पांच बजे तक के मतदान के आंकड़े दिए और शाम साढ़े पांच बजे से साढ़े सात बजे तक 65 लाख मतदाताओं ने मतदान कर दिया।' कांग्रेस नेता ने कहा कि इतने समय में इतने अधिक लोगों का मतदान केंद्र तक पहुंच कर वोट डालना संभव नहीं है। उनका कहना था कि एक मतदाता को मतदान करने में लगभग तीन मिनट लगते हैं और अगर हिसाब लगाएं तो इसका मतलब है कि मतदाताओं की कतारें देर रात दो बजे तक लगी रही होंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

उन्होंने कहा, 'जब हमने उनसे वीडियोग्राफी के लिए कहा, तो उन्होंने न केवल इनकार कर दिया, बल्कि उन्होंने कानून भी बदल दिया ताकि अब हमें वीडियोग्राफी के लिए कहने की अनुमति न मिले।' गांधी ने कहा, 'यह हमारे लिए बिल्कुल स्पष्ट है कि निर्वाचन आयोग की (सरकार से) मिलीभगत है और यह भी स्पष्ट है कि प्रणाली में कुछ गड़बड़ है।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article