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मुंबई में होने वाला था 26/11 से भी बड़ा और हाईटेक हमला, आतंकियों के टारगेट पर थे VIP मूवमेंट और बड़े मंदिर

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 2, 2023, 08:27 AM IST

Terrorist Conspiracy in Mumbai: आतंकी मुंबई के बड़े मंदिरों को टारगेट कर रहे थे और यहां बड़ा हमला करना चाहते थे। दरअसल, ऐसे मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक होती है। इसके अलावा देश की पनबिजली परियोजनाएं और वीआईपी मूवमेंट भी इन आतंकियों के टारगेट पर थे।

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मुंबई में आतंकी हमला करना चाहते थे आतंकी

Terrorist Conspiracy in Mumbai: मुंबई में एक बार फिर से 26/11 जैसा हमला करने की साजिश रची जा रही थी। यह हमला 26/11 से भी बड़ा और हाईटेक होता। इस बात का खुलासा शीर्ष खुफिया एजेंसियों के सूत्रों द्वारा किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों पुणे में आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ये दोनों लोग मुंबई को एक बार फिर से आतंकवादी हमला करने की साजिश रच रहे थे।

सूत्रों के मुताबिक, 18 जुलाई को एटीएस ने पुणे के कोथरूट इलाके से मोहम्मद इमरान और मोहम्मद यूनुस को गिरफ्तार किया था। एजेंसियों को पूछताछ के दौरान पता चला है कि दोनों आरोपी इस्लामिक स्टेट खुसारान प्रांत (ISKP) से जुड़े हुए थे और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आतंकी हमला करने की साजिश रच रहे थे।

NIA को भी थी तलाश

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए दोनों आंतकियों की तलाश राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को भी थी। जांच एजेंसी राजस्थान के एक मामले में दोनों की तलाश कर रही थी। बीते शुक्रवार को एटीएस ने दोनों से पूछताछ के आधार पर रत्नागिरी के पेंडारी से सिमाब नसरुद्दीन काजी को भी गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान पता चला है कि काजी मैकेनिकल इंजीनियर है और उसने कादिर दस्तगीर पठान नाम के एक व्यक्ति को पैसे भेजे थे।

मुंबई के बड़े मंदिरों पर हमला करना चाहते थे आरोपी

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकी मुंबई के बड़े मंदिरों को टारगेट कर रहे थे और यहां बड़ा हमला करना चाहते थे। दरअसल, ऐसे मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक होती है। सूत्रों से पता चला है कि गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकी इमरान और यूनुस IS या ISIS के संचालक हैं और उन्होंने कोलाबा स्लम एरिया के महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी भी की थी।

पनबिजली परियोजनाएं और वीआईपी मूवमेंट भी थे टारगेट

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि देश की पनबिजली परियोजनाएं और वीआईपी मूवमेंट भी इन आतंकियों के टारगेट पर थे। उन्होंने इन स्थानों की तस्वीरें भी खींची थीं। इसके साथ ही वे लोगों को आईईडी और बम बनाने की ट्रेनिंग भी दे रहे थे। आतंकियों के ठिकानों से बहुत भी सामग्री भी बरामद की गई है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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