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रूस से भारत लाया जाएगा तेजपाल सिंह का शव, दूतावास ने परिवार से मांगी डीएनए रिपोर्ट

Russia Ukraine war: तेजपाल की पत्नी परमिंदर कौर ने कहा कि हमें तीन महीने तक तेजपाल की मौत की खबर तक नहीं थी। लेकिन, 9 जून को परिवार को तेजपाल की मौत के बारे में पता चला। उन्होंने कहा, रूसी दूतावास ने उनके पति की मां की डीएनए रिपोर्ट मांगी है, ताकि शव की शिनाख्त की जा सके।

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तेजपाल सिंह की पत्नी परमिंदर कौर

Photo : IANS

Russia Ukraine war: रूस-यूक्रेन युद्ध में जान गंवाने वाले तेजपाल सिंह के पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रूसी दूतावास ने पंजाब के अमृतसर में रहने वाले तेजपाल सिंह के परिवार से डीएनए रिपोर्ट मांगी है। बता दें, तेजपाल सिंह रूसी सेना में तैनात थे। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद से ही उनका परिवार भारत सरकार से तेजपाल का शव भारत लाने की मांग कर रहा था।

तेजपाल की पत्नी परमिंदर कौर ने बताया कि दूतावास ने उनके पति की मां की डीएनए रिपोर्ट मांगी है, ताकि शव की शिनाख्त की जा सके। उन्होंने कहा, मेरे पति के शव के बारे में मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास की ओर से अब तक कोई जानकारी नहीं दी गई। सिर्फ डीएनए रिपोर्ट मांगी गई है। इस संबंध में स्थानीय पुलिस घर आई थी और तेजपाल की फाइलें साथ लेकर चली गई है। आगे की जानकारी देने के लिए परिवार के सदस्यों को सोमवार को मिलने के लिए बुलाया गया है।

तीन महीने तक परिवार को नहीं दी गई मौत की खबर

तेजपाल की पत्नी परमिंदर कौर ने कहा कि हमें तीन महीने तक तेजपाल की मौत की खबर तक नहीं थी। लेकिन, 9 जून को परिवार को तेजपाल की मौत के बारे में पता चला। उनकी मौत करीब पांच महीने पहले हुई थी। हमारे बच्चे सिर्फ इंतजार करते रहे कि पापा से वीडियो कॉल पर बात होगी। वहीं, तेजपाल की मां ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, मैं अपने बेटे का अंतिम संस्कार करना चाहती हूं। अगर हमारी सरकारें अच्छी होतीं तो मेरा बेटा आज विदेश जाकर नहीं मरता।

इसी साल जनवरी में रूस गए थे तेजपाल सिंह

तेजपाल सिंह इस साल जनवरी में रूस गया था। कुछ समय बाद ही वह रूस की सेना में शामिल हो गया और यूक्रेन में युद्ध के दौरान शहीद हो गया। मार्च में ही तेजपाल की मौत हुई थी, लेकिन परिवार को उसकी मौत की खबर 9 जून को मिली।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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