देश

Silkyara Tunnel: बचाव कार्य में बार-बार अड़चनें, मजदूर बेचैन और तनावग्रस्त, पूछ रहे- हम कब बाहर आएंगे

  • Edited by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Nov 25, 2023, 06:15 PM IST

फंसे हुए श्रमिकों और उनके रिश्तेदारों के बीच बातचीत छह इंच चौड़े पाइप के माध्यम से हो रही है। इस पाइप के माध्यम से एक एंडोस्कोपिक कैमरा भी डाला गया है...

Image

सिलक्यारा सुरंग में फंसे मजदूर (File photo)

Photo : ANI

Silkyara Tunnel: ‘वह बहुत तनावग्रस्त और बेचैन लग रहे थे और हमसे पूछा कि वे कब बाहर आएंगे।’यह बात सुनीता ने शनिवार को कही जिनके देवर वीरेंद्र पिछले 13 दिनों से सिलक्यारा में सुरंग के एक हिस्से के ढह जाने की वजह से फंसे 41 श्रमिकों में शामिल हैं। वीरेंद्र के इन शब्दों ने सुरंग में फंसे श्रमिकों और यहां इकट्ठा हुए उनके रिश्तेदारों की मनोदशा को व्यक्त किया। बचाव कार्य में जैसे-जैसे एक के बाद एक बाधाएं आ रही हैं, बेचैनी और निराशा बढ़ती जा रही है।

लगातार पूछ रहे, कब बाहर आएंगे

सुनीता ने आज सुबह वीरेंद्र के साथ बातचीत के बाद कहा, आज हमने लगभग 10 मिनट तक बात की...उन्होंने (वीरेंद्र) आज सुबह खाना नहीं खाया। उन्होंने मुझसे कहा कि वह खाना नहीं खाना चाहते... हम अब बहुत चिंतित हैं। वह बहुत तनावग्रस्त और बेचैन लग रहे थे। वह हमसे लगातार पूछ रहे थे कि वे कब बाहर आएंगे। बिहार की रहने वाली सुनीता अपने पति देवेंद्र और वीरेंद्र की पत्नी के साथ घटनास्थल पर आई हैं। वीरेंद्र के बड़े भाई देवेंद्र ने कहा कि अधिकारी उन्हें हर दिन उम्मीद दे रहे हैं लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है।

लगातार अड़चनों से परिजन बेहद निराश

देवेंद्र ने निराशा भरे स्वर में कहा, पिछले दो दिनों से हमें अधिकारियों द्वारा आश्वासन दिया जा रहा है कि उन्हें (फंसे हुए श्रमिकों को) जल्द ही निकाला जा रहा है, लेकिन कुछ न कुछ होता रहता है और प्रक्रिया विलंबित हो जाती है। फंसे हुए श्रमिकों और उनके रिश्तेदारों के बीच बातचीत छह इंच चौड़े पाइप के माध्यम से हो रही है। इस पाइप के माध्यम से एक एंडोस्कोपिक कैमरा भी डाला गया है, जिससे बचावकर्मियों और फंसे व्यक्ति के रिश्तेदारों को अंदर की स्थिति देखने को मिली। बचावकर्मी अब फंसे श्रमिकों के लिए बाहर का रास्ता बनाने के लिए मलबे के बीच एक चौड़ा पाइप डालने की कोशिश कर रहे हैं।

ऑगर मशीन भी टूटी, काम रुका

सुरंग के टूटे हुए हिस्से में ड्रिलिंग शुक्रवार से रोक दी गई क्योंकि ऑगर मशीन को एक के बाद एक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। मौके पर मौजूद एक सुरंग विशेषज्ञ ने शनिवार को कहा कि मशीन टूट गई है। बचावकर्ता अब अन्य विकल्प तलाश रहे हैं जैसे कि 10 से 12 मीटर के शेष हिस्से को हाथ से ड्रिलिंग करना या अंदर फंसे 41 मजदूरों के लिए एक लंबवत मार्ग बनाना। चारधाम यात्रा मार्ग पर बन रही सुरंग का एक हिस्सा 12 नवंबर को ढह गया था, जिससे उसमें काम कर रहे श्रमिक मलबे के दूसरी ओर फंस गए थे। तब से विभिन्न एजेंसियां उन्हें बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चला रही हैं। (भाषा)

अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article