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मौत के बाद खुली डंबरू की हकीकत तो सब हुए हैरान, घर के हर कोने में मिले नोटों के बंडल, जी रहा था गरीबों से भी बदतर जिंदगी

ओडिशा के मलकानगिरी जिले के मुख्य अस्पताल में काम करने वाले स्वीपर डंबरू गड़ा की अचानक मौत के बाद हुए खुलासे ने न सिर्फ अस्पताल के स्टाफ को बल्कि पूरे इलाके को चौंका दिया है।

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डंबरू के घर में नोटों का अंबार

Dambru Gada Story: इंसान पैसा कमाने के लिए न जाने क्या-क्या करता है और इसे अपने व परिवार के लिए हर सुख-सुविधा की चीजों का इंतजाम करता है। लेकिन किसी ऐसे शख्स के बारे में क्या कहेंगे जो रहता तो बिल्कुल गरीबों की तरह था, लेकिन असल में लखपति था। ऐसे ही एक शख्स की कहानी ओडिशा के मलकानगिरी में सामने आई है जिसने पूरा जीवन गरीबी और अभावों में बिता दिया, लेकिन असल में वह अकूत दौलत का मालिक था। दरअसल, डंबरू गड़ा नाम का ये शख्स एक अस्पताल में स्वीपर का काम करता था और इसने कंजूसी की हद कर दी थी। उसने जितना पैसा कमाया, सब यहीं छोड़कर चला गया और उसका कोई वारिस भी नहीं है जो इन पैसों को भोग सके।

स्वीपर डंबरू गड़ा की मौत के बाद खुलासा

ओडिशा के मलकानगिरी जिले के मुख्य अस्पताल में काम करने वाले स्वीपर डंबरू गड़ा की अचानक मौत के बाद हुए खुलासे ने न सिर्फ अस्पताल के स्टाफ को बल्कि पूरे इलाके को चौंका दिया है। 33 साल तक एक छोटे से सरकारी क्वार्टर में रहने वाला डंबरू हमेशा सामान्य जिंदगी जीता था। न अच्छे कपड़े, न अच्छा खाना, और न ही कोई आराम की चीजें। लेकिन उसकी मौत के बाद जब घर की तलाशी हुई, तो कुछ ऐसी बात सामने आई जिसके बारे में किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था।

घर से लाखों रुपये नगद बरामद

डंबरू के घर से लाखों रुपये नगद बरामद हुए। बैग, बिस्तर के नीचे, किताबों के बीच, हर जगह से नोटों की गड्डियां निकलीं। कहीं पचास के नोट, कहीं सौ, तो कहीं पांच सौ के बंडल। कुल मिलाकर उसके घर से लाखों रुपये मिले। इतना ही नहीं, बैंक खातों और पीएफ मिलाकर उनकी संपत्ति करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है।

डंबरू के घर मिला खजाना

डंबरू के घर मिला खजाना

पैसे छिपाकर रखता था

डंबरू पैसे छिपाकर रखता था, लेकिन खर्च करना शायद उनकी आदत में नहीं था। बिजली कनेक्शन होते हुए भी वो मोमबत्ती जलाकर रहता था। महीने में 50 हजार रुपये की सैलरी मिलने के बावजूद उसके घर में एक पुराना खटोला, एक गमछा और एक पुरानी ड्रेस ही थी। कुछ साल पहले उसकी साइकिल चोरी हो गई थी, लेकिन नई साइकिल भी नहीं खरीदी, पैदल ही अस्पताल आता-जाता रहा।

डंबरू ने शादी नहीं की

डंबरू ने कभी शादी नहीं की, और उसका कोई निकट रिश्तेदार भी नहीं था। पड़ोसियों के मुताबिक, वो खाना भी बाहर से मांगकर या सस्ते ढाबों से खाकर अपना गुजारा करता था। उसकी मौत के बाद पुलिस की मौजूदगी में जब उनके घर का ताला टूटा, तब ये अकूत पैसा सामने आया।

सारी जमा पूंजी किसकी होगी?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि डंबरू की ये सारी जमा पूंजी किसकी होगी? क्योंकि उनके कोई सीधा वारिस नहीं है, और अब प्रशासन को यह तय करना होगा कि यह पैसा किसे सौंपा जाए। डंबरू की ये कहानी यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि आखिर किसलिए हम जीवन भर पैसा जोड़ते हैं, ऐसा पैसा आखिर किस काम का, जिसे न खुद इस्तेमाल कर सकें, और न ही किसी को दे सकें।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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