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स्वच्छ भारत मिशन को लग रहा चार चांद, साथ ही पैदा हो रहे रोजगार के नए अवसर

Swachh Bharat Mission: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को साफ-सुथरा बनाने के मकसद से स्वच्छ भारत मिशन लॉन्च किया था। इन सपनों को चार-चांद लगाने की तमाम कोशिशें हो रही हैं, इसी क्रम में एक कंपनी स्वच्छ भारत बनाने के साथ-साथ लोगों को रोजगार भी दे रही है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर।

किसी भी मिशन को सफल बनाने में बेहतर योजना और संसाधन की जरूरत होती है, देश की सत्ता संभालते ही पीएम मोदी ने अपने हाथों में झाड़ू उठाकर भारत को स्वच्छ बनाने का सपना बुना था। लोगों को रोजगार के नए अवसर देने के खातिर सरकार ने कई बड़ी योजनाओं की शुरुआत की। छोटे-छोटे कारीगरों की योग्यताओं को नया मंच देने की कोशिशें शुरू हुईं। रतन ब्रूम एक ऐसी कंपनी है, जो पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के साथ-साथ लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर रही है।

कारीगरों की जिंदगी बदल रही है ये कंपनी

स्वच्छ भारत मिशन को चार चांद लगाने के लिए देश बड़े-बड़े दिग्गजों के हाथों में सभी ने झाड़ू देखा। नेता हो या अधिकारी, लोगों में जागरुकता की ज्वाला देखने को मिली। रतन ब्रूम कि भारत में एक ऐसी झाड़ू कंपनी है, जो न सिर्फ स्वच्छता मिशन में अपना योगदान दे रही है बल्कि अपनी इकाइयों के जरिए झाड़ू निर्माण में लगे कारीगरों मुख्यता महिलाओं को रोजगार प्रदान कर उनकी भी जिंदगी बदल रही है।

कभी इस व्यवसाय में आने से डरते थे दिग्गज व्यवसायी

एक वक्त ऐसा था कि कोई भी व्यवसायी इस सेक्टर में अपना कदम बढ़ाने से डरता था क्योंकि यह व्यवसाय हस्तनिर्मित और श्रम आधारित है, लेकिन साल 2011 में नई दिल्ली में स्थापित, रतन ब्रूम्स प्रोडक्ट्स को कंपनी के कुशल नेतृत्व में भागवत शर्मा ने कई वर्षों की कड़ी मेहनत से भारतीय बाजार में अपना नाम बनाया है। रतन ब्रूम (Ratan Broom) कंपनी ने भारतीय बाजार में स्वच्छता उत्पादों की एक नई रेंज (खासकर फूल झाड़ू) लॉन्च की है, जो न केवल किफायती है बल्कि पर्यावरण के अनुकूल एवं उपयोग में भी बेहद प्रभावी है।

बदल रही है किसानों की जिंदगी, जानिए कैसे

उत्पादों की बात की जाए तो ये कंपनी फूल झाड़ू, नारियल झाड़ू, नॉन-डस्ट झाड़ू के साथ ही फ्लोर वाइपर एवं किचन क्लॉथ का निर्माण भी करती है। इसके उत्पादों की काफी प्रशंसा देखने को मिलती है। दिल्ली सहित उसके आस पास के राज्यों में इस कंपनी के प्रोडक्ट्स को बेहद पसंद किया जा रहा है। कंपनी अपनी झाड़ू में मिजोरम घास और शिलांग घास का मुख्यता प्रयोग करती है जो कि काफी लंबे समय तक उपयोग में आती है, इसके साथ ही रतन ब्रूम मिजोरम और मेघालय के किसानों की मदद से घास खरीदकर उन किसानों की भी आर्थिक मदद कर रही है।

स्वच्छ भारत मिशन के साथ-साथ महिलाओं के लिए नया अवसर पैदा हो रहे हैं, साथ ही किसानों की आमदनी में इजाफा हो रहा है। भागवत शर्मा इन सभी दृष्टिकोण से इसे स्थापित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। स्वच्छता का अर्थ केवल सफाई नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और सुरक्षित जीवनशैली भी है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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