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'लाइसेंस सस्पेंड करना दंडात्मक कार्रवाई नहीं...', Times Now Amazing Indian Awards 2026 में बोले FDA कमिश्नर मुंढे

Times Now Amazing Indian Awards 2026: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने टाइम्स नाउ के कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि लाइसेंस निलंबित होने का मतलब कारोबार को हमेशा के लिए बंद करना नहीं है।

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एफडीए चीफ तुकाराम मुंढे

Photo : Times Now Digital

Times Now Amazing Indian Awards 2026: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने राज्य में जारी खाद्य सुरक्षा कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि लाइसेंस निलंबित करना किसी कारोबार को बंद करने का तरीका नहीं, बल्कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया 'निवारक और सुधारात्मक कदम' है।

टाइम्स नाउ अमेजिंग इंडियन अवॉर्ड्स 2026 कार्यक्रम में टाइम्स नाउ के मैनेजिंग एडिटर जक्का जैकब के साथ खास बातचीत में मुंढे ने कहा कि एफडीए का उद्देश्य वास्तविक और नियमों का पालन करने वाले कारोबार को रोकना नहीं है। उनका कहना है कि खाद्य प्रतिष्ठानों को सुरक्षा नियमों और निर्धारित मानकों का पालन करना जरूरी है। उन्होंने कहा, ''यह दंडात्मक उपाय नहीं है। यह मूल रूप से निवारक और सुधारात्मक उपाय है। अगर यह दंडात्मक होता तो मैं लाइसेंस निलंबित नहीं, रद्द करता।''

लाइसेंस निलंबन और रद्द करने में अंतर

मुंढे ने बताया कि लाइसेंस निलंबित होने का मतलब कारोबार को हमेशा के लिए बंद करना नहीं है। उन्होंने कहा कि लाइसेंस निलंबन के दौरान संबंधित प्रतिष्ठान के उत्पादन, बिक्री या निर्माण पर रोक रहती है। जैसे ही प्रतिष्ठान कमियों को दूर करके नियमों का पालन करता है, लाइसेंस बहाल किया जा सकता है।

इसके विपरीत, लाइसेंस रद्द होने का मतलब कारोबार का स्थायी रूप से बंद होना हो सकता है। उन्होंने कहा कि एफडीए का काम कारोबार बंद करना नहीं, बल्कि वास्तविक कारोबार को बढ़ावा देना है। एफडीए कमिश्नर ने साफ किया कि वास्तविक कारोबार को सक्षम बनाना हमारी प्रमुख रणनीतियों में से एक है।

'खाद्य सुरक्षा नियमों से समझौता नहीं'

एफडीए कमिश्नर ने कहा कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसका सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य से है। उन्होंने कहा कि होटल, रेस्त्रां या किसी अन्य खाद्य कारोबार में उत्पादों की मांग अधिक होने का मतलब यह नहीं है कि सुरक्षा मानकों से समझौता किया जाए।

मुंढे ने असुरक्षित भोजन को 'साइलेंट किलर' बताते हुए कहा कि इसके दुष्प्रभाव हमेशा तत्काल दिखाई नहीं देते। उनके मुताबिक, लंबे समय में इसका असर विभिन्न बीमारियों, खासकर गैर-संचारी रोगों के रूप में सामने आ सकता है।

वसूली के आरोपों पर क्या बोले मुंढे?

महाराष्ट्र में एफडीए की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने विभाग पर कथित तौर पर वसूली के आरोप लगाए हैं। आरोपों में दावा किया गया कि कारोबारियों से कथित तौर पर मांगी जाने वाली रकम पहले 10 हजार रुपये थी, जो बढ़कर 2 लाख रुपये हो गई है।

मुंढे ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया और आरोप लगाने वालों से सबूत पेश करने को कहा। कारोबार और निवेश को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाने के आरोपों पर मुंढे ने कहा कि यदि एफडीए का उद्देश्य कारोबार बंद करना होता तो निलंबित किए गए लाइसेंस बहाल क्यों किए जाते। उन्होंने कहा कि कई ऐसे मामलों में नियमों का पालन करने के बाद लाइसेंस बहाल किए गए हैं।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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