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सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला रखा बरकरार, सांसद मोहनभाई डेलकर की मौत मामले में दर्ज FIR खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने आज बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें 2021 में दादरा और नगर हवेली के सात बार के सांसद मोहनभाई संजीभाई डेलकर की मौत से जुड़े आत्महत्या के लिए उकसाने और वसूली के आरोपों वाली FIR रद्द कर दी गई थी।

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सांसद मोहनभाई डेलकर की मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला रखा बरकरार

ई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें 2021 में दादरा और नगर हवेली के सात बार के सांसद मोहनभाई संजीभाई डेलकर की मौत से जुड़े आत्महत्या के लिए उकसाने और वसूली के आरोपों वाली FIR रद्द कर दी गई थी।

क्या था मामला?

22 फरवरी 2021 को मोहनभाई डेलकर मुंबई के मरीन ड्राइव के पास मौजूद होटल सी ग्रीन साउथ के कमरे में मृत पाए गए थे। इसके बाद उनके बेटे अभिनव मोहन डेलकर ने तत्कालीन प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल, कलेक्टर संदीप कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक शरद दराड़े और अन्य अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी।

FIR में क्या था आरोप?

FIR में आरोप लगाया गया था कि डेलकर को जानबूझकर परेशान और अपमानित किया गया। उनके कथित उत्पीड़न के पीछे दो मकसद थे-पहला, डेलकर के कॉलेज पर नियंत्रण पाना और दूसरा, उन्हें अगला लोकसभा चुनाव लड़ने से रोकना था। FIR में ये भी कहा गया था कि अनुसूचित जनजाति से होने के कारण डेलकर के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपमानजनक व्यवहार किया जाता था।

आरोपियों के खिलाफ मुकदम आईपीसी की तहत आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा 306, आपराधिक धमकी की धारा 506, 389, 120-B और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3 के तहत दर्ज की गई थी।

हाईकोर्ट ने किस आधार पर FIR रद्द की थी?

8 सितंबर 2022 को बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले और जस्टिस श्रीकांत डी. कुलकर्णी की बेंच ने आरोपियों के खिलाफ FIR रद्द करते हुए कहा था कि यह केवल डेलकर की धारणा भर थी कि उनके साथ अपमानजनक व्यवहार हुआ। इस बात के भी ठोस सबूत नहीं मिले कि आरोपी मृत सांसद डेलकर के कॉलेज पर नियंत्रण करना चाहते थे।हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा था कि केवल आरोप और धारणाओं के आधार पर आपराधिक मुकदमा चलाना न्याय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। वही इस बात के भी कोई सबूत नहीं मिले कि आरोपी एक साथ मिले थे और किसी साजिश को अंजाम दिया गया।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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