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Supreme Court ने कहा कि हाईकोर्ट में मामला लंबित होने पर सीधे सुप्रीम कोर्ट जाना न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने इस प्रवृत्ति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल अब जरूरत से ज्यादा किया जा रहा है।

SUPREME COURT

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने 16 जनवरी को कड़े शब्दों में कहा कि जब कोई मामला पहले से हाईकोर्ट में लंबित हो, तब सीधे संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल करना न्यायिक प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने इस प्रवृत्ति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल अब जरूरत से ज्यादा किया जा रहा है।

कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट में एक बार सुनवाई टलते ही लोग सीधे सुप्रीम कोर्ट आ जाते हैं, जो सही तरीका नहीं है। जस्टिस भुइयां ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 32 नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए है, न कि हर तरह के विवाद के लिए।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में पितृत्व परीक्षण कराने के लिए हाईकोर्ट जाने की अनुमति मांगी थी। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट किसी को इस तरह की कानूनी सलाह नहीं देगा और याचिकाकर्ता को जहां उचित लगे वहां आवेदन करना चाहिए।अंत में अदालत ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग हैं और याचिका को खारिज कर दिया गया।

ईडी बनाम टीएमसी और पश्चिम बंगाल सरकार केस से कैसे जुड़ा है यह मामला?

हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने टीएमसी और पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जबकि संबंधित मामला पहले से हाईकोर्ट में लंबित था। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उसी तरह की याचिकाओं पर एक व्यापक संदेश के रूप में देखी जा रही है कि जब मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन हो तो सीधे शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाना अनुचित है।

अनुच्छेद 32 के बढ़ते दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाल के वर्षों में अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल होने वाली याचिकाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है, जो चिंता का विषय है।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि बड़ी संख्या में ऐसी याचिकाएं दिल्ली के आसपास स्थित हाईकोर्ट के मामलों से जुड़ी होती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि नागरिकों को पहले हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए और तभी शीर्ष अदालत आना चाहिए जब वास्तव में मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो और कोई अन्य प्रभावी उपाय उपलब्ध न हो।

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गौरव श्रीवास्तव
गौरव श्रीवास्तव author

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुना... और देखें

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