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जल्द सुनवाई की जरूरत नहीं- राम मंदिर चंदा चोरी से जुड़ी याचिका पर बोला सुप्रीम कोर्ट, जानें क्या-क्या की गई है मांग

Ram mandir Donation Row: राम मंदिर चंदा चोरी मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर चंदा चोरी की याचिका पर जल्द सुनवाई से किया इनकार (फाइल फोटो- PTI)

Ram mandir Donation Row: राम मंदिर चंदा चोरी का मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की दहलीज पर पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि राम मंदिर चंदा चोरी से जुड़ी याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया और इसे रेगुलर बेंच के पास भेज दिया है, जो छुट्टियों के बाद इस पर सुनवाई करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में फिलहाल जल्द सुनवाई की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छुट्टियों के बाद रेगुलर बेंच में लिस्ट करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायाधीश शील नागू की पीठ ने कहा कि इस मामले को ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। पीठ ने मौखिक टिप्पणी की, ’’आसमान नहीं टूट पड़ेगा ...इतनी क्या जल्दी है।’’

याचिका में क्या-क्या?

अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के नेतृत्व वाले एक बहु-विषयक विशेष जांच दल (एसआईटी) को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मामलों और प्रशासन से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं व अन्य कथित अवैधताओं की जांच करनी चाहिए। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाली याचिका में केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर ट्रस्ट को सार्वजनिक हित की रक्षा करने तथा करोड़ों भक्तों व दानदाताओं का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक नियामक, पर्यवेक्षी और ऑडिट तंत्र का गठन व संचालन करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है। याचिका में कहा गया, ’’श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े धन के कथित गबन और अन्य कथित अनियमितताओं की खबरें सही साबित हों या नहीं, लेकिन इन खबरों ने उन पीढ़ियों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है, जिन्होंने अयोध्या की गौरवपूर्ण विरासत की पुनर्स्थापना के लिए लंबा संघर्ष किया है।’’

इसमें आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बिना किसी प्राथमिकी या नियमित आपराधिक मामला दर्ज किए इस मामले की जांच शुरू कर दी है। याचिका में कहा गया है कि मंदिर ट्रस्ट से कथित रूप से धन गायब होने और अन्य कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित रिपोर्टों की सत्यता की स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए। याचिका के अनुसार, यह जांच ऐसी एकीकृत जांच एजेंसी द्वारा कराई जानी चाहिए, जिसके पास जटिल वित्तीय और आपराधिक मामलों की जांच के लिए आवश्यक विशेषज्ञता, संसाधन और संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध हो। इसमें कहा गया है, ’’ऐसी जांच से आम लोगों का भरोसा अधिक मजबूत होगा, बजाय इसके कि केवल प्रशासनिक अधिकारियों वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) प्रारंभिक जांच करे, जिनके पास आपराधिक मामलों की जांच की विशेषज्ञता शायद नहीं हो।’’

राम मंदिर चंदा चोरी में अबतक क्या-क्या हुआ?

बता दें कि राम मंदिर चंदा चोरी मामले में पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। जिसमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं। ये सभी राम मंदिर में दान के रूप में आई नकदी और कीमती सामान गिनने के काम से जुड़े थे। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत नौकर द्वारा चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी का सामान लेने और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। यह प्राथमिकी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट की सिफारिश पर दर्ज की गई है। इनके पास से जांचकर्ताओं ने अब तक 79.85 लाख रुपये बरामद किए हैं।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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