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दिल्ली में बैठकर इस तरह के मुद्दे उठाने का आधार क्या है- सिक्किम SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का दखल देने से इनकार

Sikkim SIR: सिक्किम में SIR के लिए 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया।

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो- PTI)

Sikkim SIR: सिक्किम में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के लिए 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दखल देने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस जे.वी. मोहना की बेंच ने कहा कि सिक्किम में 2002 में भी SIR हुआ था और चुनाव आयोग ने पूरे देश में एक समान वर्ष को आधार बनाने का नीतिगत फैसला लिया है।

याचिका में क्या मांग की गई थी?

एक पब्लिक ट्रस्ट सिक्किमिज मूलनिवासी सुरक्षा संघ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सिक्किम को SIR के मामले में विशेष स्थिति देने की मांग की थी। याचिकाकर्ता की दलील थी कि सिक्किम के आबादी के आंकड़े दूसरे राज्यों से अलग हैं और मौजूदा जनसंख्या के आंकड़े मतदाता सूची के आंकड़ों से मेल नहीं खाते।

याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि SIR के लिए 2002 की जगह 1979, 1983, 1988 या 1993 में हुए पुराने गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची को संदर्भ सामग्री के तौर पर इस्तेमाल किया जाए।

CJI ने पूछा- दिल्ली में बैठकर यह मुद्दा क्यों?

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से पूछा कि उन्हें यह नहीं पता कि याचिकाकर्ता राज्य का शुभचिंतक है या नहीं और दिल्ली में बैठकर इस तरह के मुद्दे उठाने का आधार क्या है। चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि राज्य सरकार इस तरह के मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठा सकती है। कोर्ट ने गौर किया कि सिक्किम से किसी राजनीतिक दल या किसी मतदाता ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति नहीं जताई है और SIR में सभी राजनीतिक दल सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वे सिक्किम में ही स्थित हैं और हाईकोर्ट इस मामले को सुन सकता था, लेकिन उसके हाथ बंधे हुए थे।

कोर्ट ने 2002 के SIR पर क्या कहा?

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि याचिकाकर्ता का यह मामला नहीं है कि सिक्किम में 2002 में SIR हुआ ही नहीं था। 2002 में SIR हुआ था। याचिकाकर्ता का तर्क यह है कि उस प्रक्रिया में ऐसी आबादी भी शामिल हो गई, जो संभवतः प्रवासी आबादी थी। जस्टिस बागची ने कहा कि अब SIR का आधार 1993 करना पूरे देश में अपनाए गए समान तरीके से अलग और असमान दृष्टिकोण हो सकता है। चीफ जस्टिस ने भी सवाल किया कि क्या याचिकाकर्ता अदालत से उन मतदाताओं को हटाने की मांग कर रहा है जो 2002 में और उससे पहले भी मतदाता सूची में मौजूद थे।

याचिकाकर्ता ने जनसंख्या में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि हर रिवीजन के साथ सिक्किम की आबादी के आंकड़ों में उछाल दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि 1989 तक आंकड़े स्थिर हो गए थे, लेकिन 2002 में आधार क्या था, इसकी कोई स्पष्ट व्याख्या नहीं की गई है। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि SIR के नोटिफिकेशन में इसका उल्लेख मौजूद है। याचिकाकर्ता के वकील ने जवाब दिया कि आखिरी SIR को आधार बनाने से उसका कारण स्पष्ट नहीं होता, यह सिर्फ एक माइलस्टोन है। सुनवाई में चुनाव आयोग की ओर से मुख्य दलील यह थी कि सिक्किम में 2002 में SIR हो चुका था, इसलिए मौजूदा SIR के लिए उसी को आधार बनाया गया है। आयोग के वकील ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता काफी देर से सुप्रीम कोर्ट आया है, जबकि SIR की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और दावे-आपत्तियों का निपटारा किया जा रहा है। आयोग के मुताबिक फाइनल वोटर लिस्ट 6 सितंबर को प्रकाशित की जानी है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दखल देने से इनकार किया?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि सिक्किम में 2002 में SIR हुआ था। चुनाव आयोग ने पूरे देश में एक समान वर्ष को आधार बनाया है और यह मूल रूप से एक नीतिगत फैसला है। कोर्ट ने कहा कि सिक्किम से किसी राजनीतिक दल या अन्य हितधारक ने इस फैसले का विरोध नहीं किया है। इसलिए उसे यह मामला न्यायिक समीक्षा के लिए उपयुक्त नहीं लगता। कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने उसे बताया है कि SIR की प्रक्रिया में जरूरी कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। ऐसे में 2002 को आधार वर्ष तय करने में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता इस मुद्दे को चुनाव आयोग के सामने उठा सकता है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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