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पश्चिम बंगाल SIR मामला: सुप्रीम कोर्ट ने EC से मांगा अपीलों का ब्योरा, अधीर रंजन चौधरी बोले- '34 लाख लोग मताधिकार से वंचित'

Election Commission Of India Notice: न्यायालय ने राज्य में अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा निस्तारित और लंबित मामलों की जानकारी भी तलब की। निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी करते हुए आगे की सुनवाई के लिए 25 अगस्त की तारीख तय की।

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पश्चिम बंगाल SIR मामला: सुप्रीम कोर्ट ने EC से मांगा अपीलों का ब्योरा, अधीर रंजन चौधरी बोले- '34 लाख लोग मताधिकार से वंचित'

Supreme Court West Bengal SIR Voters: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग से उन अपील का ब्योरा तलब किया जिन पर शीर्ष अदालत द्वारा गठित न्यायाधिकरणों ने अब तक फैसला सुनाया है। इन न्यायाधिकरणों को उन लोगों की शिकायतों पर सुनवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिनके नाम पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान हटाए गए।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह निर्देश कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की उस याचिका पर दिया, जिसमें राज्य में अपीलीय न्यायाधिकरण के सामने एसआईआर से जुड़े मामलों के यथाशीघ्र निस्तारण का अनुरोध किया गया था।

आगे की सुनवाई के लिए 25 अगस्त तय

न्यायालय ने राज्य में अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा निस्तारित और लंबित मामलों की जानकारी भी तलब की। निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी करते हुए, पीठ ने चौधरी की याचिका पर आगे की सुनवाई के लिए 25 अगस्त की तारीख तय की।

न्यायालय ने 10 मार्च को आदेश दिया था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं उनकी अपील सुनने के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में स्वतंत्र अपीलीय न्यायाधिकरण बनाए जाएं।

अपीलीय न्यायाधिकरण गठित करने के अलावा, उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड की अधीनस्थ अदालतों के न्यायाधीशों को एसआईआर से जुड़ी शिकायतों पर सुनवाई करने के लिए नियुक्त करने की मंजूरी दी थी।

लिस्ट में नाम नहीं तो राशन रक दिया जाएगा

सर्वोच्च अदालत के रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। SIR मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चौधरी ने कहा, '...बंगाल में SIR प्रक्रिया की वजह से, चुनाव आयोग के अनुसार 27 लाख आम नागरिक (हालांकि असल संख्या 34 लाख है) वोट देने के अपने अधिकार से वंचित रह गए हैं। बंगाल हाई कोर्ट के एक जज ने खुद माना है कि मामलों के निपटारे की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए इसमें कम से कम 21 साल लगेंगे, जिससे पूरे परिवार मुश्किल में पड़ जाएंगे। अगर लिस्ट में नाम नहीं होता है, तो राशन की सप्लाई रोक दी जाती है और कोई फायदा नहीं मिलता...'

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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