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महाकुंभ में भगदड़ से हुई मौतों के मामले में याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, दिया ये निर्देश

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  • Updated Feb 3, 2025, 01:30 PM IST
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महा कुंभ में भगदड़ मामला

Photo : PTI

Stampede in Mahakumbh: महाकुंभ में भगदड़ से हुई मौतों के मामले में दाखिल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ में भगदड़ एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और देश भर के तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षा उपाय और दिशानिर्देश लागू करने के निर्देश देने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।

सीजेआई बोले- महाकुंभ में हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण

सीजेआई (CJI) ने कहा कि महाकुंभ में हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह वाकई चिंता का विषय है। पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में पहले से ही इस मसले को लेकर याचिका पेंडिंग है। इसलिए याचिकाकर्ता वही जाकर अपनी बात रख सकते हैं। वहीं, यूपी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि सरकार ने जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन कर दिया है।

शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी की इन दलीलों पर गौर किया कि न्यायिक जांच शुरू की गई है। प्रयागराज में भगदड़ की घटना के एक दिन बाद 30 जनवरी को शीर्ष अदालत में यह जनहित याचिका दायर की गई थी। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत तिवारी द्वारा दायर याचिका में भगदड़ की घटनाओं को रोकने और अनुच्छेद 21 के तहत समानता एवं जीवन के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए दिशानिर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया था।

जनहित याचिका में क्या-क्या मांगें

जनहित याचिका में प्रयागराज महाकुंभ में हुई भगदड़ पर स्टेटस रिपोर्ट और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई थी। याचिका में सभी राज्यों द्वारा कुंभ मेला क्षेत्र में सुविधा सेंटर खोलने की मांग की गई थी जिससे गैर हिन्दी भाषी लोगों को सुविधा मिले।

याचिका में मांग की गई थी कि ऐसे आयोजनो में वीआईपी मूवमेंट सीमित किया जाए और ज्यादा से ज्यादा स्पेस आम आदमी के लिए रखा जाए। याचिका में बड़े धार्मिक आयोजनों में भगदड़ से बचने और लोगों को सही जानकारी दिए जाने के लिए देश की प्रमुख भाषाओं में डिस्पले बोर्ड लगाने, मोबाइल, व्हाट्सएप पर राज्यों द्वारा अपने तीर्थयात्रियों को जानकारी दिए जाने की मांग की गई थी।

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