देश

'प्राइवेट कॉलेज सरकारी की तरह चार्ज नहीं कर सकते': MBBS फीस पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, EWS छात्रों की उम्मीदों को झटका

MBBS Fees Rajasthan High Court: पूरा मामला राजस्थान के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की भारी-भरकम फीस से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसने कॉलेजों की फीस संरचना को मंजूरी दी थी।

Image

'प्राइवेट कॉलेज सरकारी की तरह चार्ज नहीं कर सकते': MBBS फीस पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, EWS छात्रों की उम्मीदों को झटका (PTI)

Supreme Court Private Medical College Fees: देश में मेडिकल की पढ़ाई (MBBS) करने का सपना देखने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की सालाना फीस संरचना में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि प्राइवेट और सरकारी कॉलेजों की तुलना नहीं की जा सकती और न ही प्राइवेट संस्थानों को सरकारी कॉलेजों की तरह कम फीस चार्ज करने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

क्या था पूरा विवाद और याचिकाकर्ता की दलील?

यह पूरा मामला राजस्थान के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की भारी-भरकम फीस से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसने कॉलेजों की फीस संरचना को मंजूरी दी थी।

याचिकाकर्ता की मुख्य दलील यह थी कि राज्य के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सालाना ट्यूशन फीस 18.9 लाख रुपये से लेकर 25 लाख रुपये तक है। दूसरी ओर, सरकार के नियमों के अनुसार EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आरक्षण का लाभ उन परिवारों को मिलता है जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपये तक है। याचिकाकर्ता का कहना था कि जिस परिवार की कुल सालाना कमाई ही 8 लाख से कम हो, वह हर साल 20-25 लाख रुपये की फीस कैसे भर सकता है? ऐसे में EWS कोटा होने के बावजूद गरीब और होनहार छात्र मेडिकल शिक्षा से वंचित रह रहे हैं।

'प्राइवेट संस्थान सेल्फ-फाइनेंसिंग हैं, दोनों का मॉडल अलग'

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस दलील को व्यावहारिक नहीं माना। सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, 'आप यह नहीं कह सकते कि प्राइवेट शैक्षणिक संस्थान भी सरकारी संस्थानों जितनी ही फीस लेंगे। ऐसा नहीं हो सकता। कोई भी आकर यह नहीं कह सकता कि प्राइवेट की फीस बहुत ज्यादा है, इसलिए इसे सरकारी जैसा बना दो। ये सभी सेल्फ-फाइनेंसिंग (खुद का खर्च उठाने वाले) संस्थान हैं।'

बेंच ने स्पष्ट किया कि सरकारी कॉलेजों को सरकार से वित्तीय सहायता (सब्सिडी) मिलती है, लेकिन प्राइवेट कॉलेज पूरी तरह से छात्रों से मिलने वाली फीस पर ही निर्भर होते हैं। कॉलेज चलाने, इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और फैकल्टी को सैलरी देने के लिए उन्हें फंड्स की जरूरत होती है।

'कैपिटेशन फीस बैन है, सामान्य फीस नहीं; हमें डॉक्टरों की जरूरत है'

अदालत ने मेडिकल शिक्षा के व्यापक पहलू को रेखांकित करते हुए कहा कि कानूनन 'कैपिटेशन फीस' (यानी डोनेशन या अतिरिक्त अवैध वसूली) पर पूरी तरह प्रतिबंध है, लेकिन प्राइवेट कॉलेजों को एक रीजनेबल फीस लेने का कानूनी अधिकार है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, 'कैपिटेशन फीस प्रतिबंधित है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सामान्य कॉलेज फीस भी नहीं ली जा सकती। अगर ऐसा किया गया, तो मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में राज्य को मिलने वाली प्राइवेट कॉलेजों की मदद बंद हो जाएगी। और हमें डॉक्टरों की जरूरत है।'

सुप्रीम कोर्ट ने दिया दूसरा रास्ता, बड़ी बहस का मुद्दा खुला छोड़ा

अफोर्डेबिलिटी (फीस चुकाने की क्षमता) की चिंता पर कोर्ट ने सुझाव दिया कि जो छात्र इतनी फीस देने में असमर्थ हैं, वे स्कॉलरशिप (छात्रवृत्ति) या सरकारी लोन और सब्सिडी जैसे अन्य वित्तीय विकल्पों का पता लगा सकते हैं।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया, जिससे राजस्थान के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की मौजूदा फीस संरचना लागू रहेगी। लेकिन, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए मेडिकल शिक्षा की पहुंच से जुड़ा यह बड़ा कानूनी सवाल पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। बेंच ने कहा कि 'क्वेश्चन ऑफ लॉ को खुला रखा गया है', जिसका मतलब है कि भविष्य में किसी उपयुक्त मामले में इस व्यापक राष्ट्रीय मुद्दे (EWS छात्रों के लिए फीस की सामर्थ्य) पर दोबारा कानूनी समीक्षा की जा सकती है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

और पढ़ें
End of Article